
कमिश्नर कार्यालय के बाहर ‘न्याय आंदोलन’ में सरकार पर कांग्रेस का जोरदार हमला, अस्पतालों की कथित बदहाली और लापरवाही को बनाया बड़ा मुद्दा
रीवा। मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले रीवा में कांग्रेस ने सोमवार को सरकार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोलते हुए ‘न्याय आंदोलन’ का आगाज किया। कमिश्नर कार्यालय के सामने आयोजित धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस ने अस्पतालों की कथित लापरवाही, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और मरीजों से जुड़े लगातार सामने आ रहे मामलों को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग बुलंद की।आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान सरकार की स्वास्थ्य नीतियों को लेकर जमकर नारेबाजी हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा कागजों पर मजबूत दिखाई देता है, लेकिन अस्पतालों तक पहुंचने वाले आम मरीजों को जमीनी स्तर पर गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।कांग्रेस ने रीवा के साथ छिंदवाड़ा, सागर और बालाघाट में सामने आई स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं को भी आंदोलन का आधार बनाया। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग जिलों में लगातार सामने आ रहे मामलों को महज अलग-अलग घटनाएं बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। कांग्रेस ने इन्हें प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
गृह जिले में ही घेरा, स्वास्थ्य मंत्री पर सीधा हमला
रीवा में आयोजित आंदोलन की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि प्रदर्शन उसी जिले में हुआ जिसे स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला माना जाता है। कांग्रेस ने इसी बिंदु को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि मंत्री के अपने क्षेत्र में ही अस्पतालों की व्यवस्था सवालों के घेरे में है, तो प्रदेश के दूसरे इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने रीवा सहित सतना और बालाघाट में सामने आए मामलों का हवाला देते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। दिग्विजय सिंह ने राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अपने ही गृह जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए।
‘इलाज के लिए अस्पताल, लेकिन व्यवस्था पर सवाल’
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश का आम नागरिक उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचता है, लेकिन वहां उसे पर्याप्त उपचार, व्यवस्थागत सुविधा और जवाबदेही के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पार्टी ने अस्पतालों में कथित चिकित्सकीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई।प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा अब किसी एक अस्पताल या किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी इसे प्रदेशव्यापी जनहित के सवाल के रूप में आगे ले जाने की तैयारी में है।रीवा में कमिश्नर कार्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कांग्रेस ने सीधे स्वास्थ्य विभाग की राजनीतिक जवाबदेही को निशाने पर लिया। आंदोलन के जरिए पार्टी ने सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों को अब राजनीतिक स्तर पर भी जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
रीवा से उठी आवाज, भोपाल तक पहुंचेगी?
स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में कांग्रेस का यह आक्रामक आंदोलन आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस ने इस्तीफे की मांग के साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति स्पष्ट कर दी है। अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया पर हैं कि इन आरोपों और मांगों का जवाब किस स्तर पर दिया जाता है। रीवा में सोमवार को शुरू हुआ ‘न्याय आंदोलन’ फिलहाल एक प्रदर्शन भर नहीं, बल्कि कांग्रेस की उस राजनीतिक रणनीति का संकेत बनकर सामने आया है जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था को सरकार के खिलाफ बड़ा जनमुद्दा बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।
