श्याम शाह मेडिकल कॉलेज को मिला नया डीन, डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग ने संभाली कमान; पहले ही दिन अस्पतालों का निरीक्षण, व्यवस्थाओं में लापरवाही पर सख्त संदेश

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रीवा। श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की प्रशासनिक व्यवस्था को अब नई दिशा मिलने की उम्मीद के बीच डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग ने नवनियुक्त डीन के रूप में विधिवत कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करते ही डॉ. गर्ग ने औपचारिकताओं तक सीमित रहने के बजाय सीधे महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालयों का निरीक्षण किया और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं तक का जायजा लिया। नए डीन की शुरुआती सक्रियता से यह स्पष्ट संकेत गया है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली, चिकित्सकीय सेवाओं और मरीजों की सुविधाओं को लेकर प्रशासन अब किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग ने निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों में पहुंचकर वहां संचालित चिकित्सा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने मरीजों के उपचार, उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता, व्यवस्थागत संसाधनों तथा विभागीय कामकाज की स्थिति को करीब से देखा। संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों से आवश्यक जानकारी लेते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर उपचार, उचित चिकित्सकीय परामर्श और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाए। डीन ने अस्पताल की व्यवस्था को केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सीधे मरीजों की सुविधा से जुड़ा विषय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और चिकित्सकों को अपने दायित्वों के प्रति गंभीर रहने के निर्देश दिए।

पहले दिन ही विभागाध्यक्षों के साथ बैठक, चिकित्सा व्यवस्था से लेकर पढ़ाई तक पर मंथन

अस्पताल निरीक्षण के बाद डीन डॉ. गर्ग ने श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। इस दौरान चिकित्सा सेवाओं, मरीजों के उपचार, शैक्षणिक गतिविधियों, विभागीय संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य फोकस संस्थान की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने पर रहा।डॉ. गर्ग ने विभागाध्यक्षों और चिकित्सकों को स्पष्ट किया कि अस्पताल में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति और मरीजों की समय पर देखभाल व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है। चिकित्सकों को निर्धारित समय पर ओपीडी में उपलब्ध रहने, नियमित राउंड करने और मरीजों की स्थिति के अनुसार आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार देने के निर्देश दिए गए हैं।

लापरवाही पर नहीं चलेगी नरमी, जिम्मेदारी तय होने का संकेत

नए डीन ने बैठक में सबसे महत्वपूर्ण संदेश जवाबदेही और अनुशासन को लेकर दिया। उन्होंने साफ किया कि निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी अस्पताल में जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था को अब केवल निर्देशों तक सीमित रखने के बजाय उसके पालन पर भी निगरानी रखने का संकेत दिया गया है।डॉ. गर्ग ने चिकित्सकों से कहा कि मरीज अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचता है और ऐसे में प्रत्येक चिकित्सकीय जिम्मेदारी को गंभीरता के साथ निभाना जरूरी है। मरीजों के साथ व्यवहार से लेकर उपचार की प्रक्रिया तक में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र मरीजों तक पहुंचाने के निर्देश

बैठक में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। डीन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के पात्र मरीज किसी भी स्तर पर उनके लाभ से वंचित न रहें और सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर उपलब्ध कराया जाए।उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए उपचार के साथ-साथ शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी संस्थान की जिम्मेदारी है।

“मरीज सर्वोच्च प्राथमिकता”, चिकित्सा शिक्षा और संस्थान के विकास पर भी जोर

डीन डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग ने कहा कि संस्थान की पहली प्राथमिकता मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और संवेदनशील चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, विभागीय समन्वय और संस्थान के समग्र विकास के लिए जरूरी सुधारों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही गई।उन्होंने विभागाध्यक्षों और चिकित्सकों से आपसी समन्वय के साथ काम करने की अपेक्षा जताई, ताकि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी मजबूत हो सके। कार्यभार संभालने के साथ ही अस्पताल निरीक्षण और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर डॉ. गर्ग ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। अब आने वाले दिनों में इन निर्देशों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है, यह श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय और उससे जुड़े अस्पतालों की कार्यप्रणाली में होने वाले बदलाव से से तय होगा।

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