नई दिल्ली।
डिजिटल युग में तेजी से बदलती दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभाव अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नीति, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन से भी सीधे जुड़ चुका है। इसी कड़ी में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत आयोजित होने वाला रिसर्च सिंपोजियम देश और दुनिया के एआई विशेषज्ञों के लिए एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। इस सिंपोजियम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें 250 से अधिक शोध प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
यह रिसर्च सिंपोजियम एआई से जुड़े शोध को वास्तविक दुनिया की जरूरतों और नीति निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एआई केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के लिए उपयोगी, जिम्मेदार और समावेशी रूप में सामने आए। कार्यक्रम 18 फरवरी 2026 को भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर ग्लोबल साउथ पोस्टर ट्रैक के तहत 30 चयनित पोस्टर, इंडिया फोरम शोकेस के 15 पोस्टर और स्टूडेंट्स शोकेस के 15 पोस्टर प्रदर्शित किए जाएंगे। इन पोस्टर्स के जरिए शोधकर्ता अपने विचार, अध्ययन और समाधान आम लोगों और नीति-निर्माताओं के सामने रखेंगे।
सिंपोजियम को एक ऐसे इंटरडिसिप्लिनरी मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां भारत, ग्लोबल साउथ और अन्य देशों के प्रमुख शोधकर्ता एक साथ आकर एआई के प्रभाव पर चर्चा करेंगे। इसमें मानव संसाधन विकास, समावेशन, सुरक्षा, भरोसेमंद तकनीक, नवाचार, विज्ञान, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण जैसे अहम विषय शामिल होंगे।
कार्यक्रम में प्लेनरी सेशन, कीनोट भाषण, फायरसाइड चैट, अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पैनल और ग्लोबल साउथ रिसर्च व पोस्टर शोकेस आयोजित किए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय पैनल में विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ एआई के नए एल्गोरिदम, तकनीकों और व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डालेंगे।
ग्लोबल साउथ के छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को यह मंच अपनी प्रतिभा दिखाने, मेंटरशिप पाने और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का अवसर देगा। उम्मीद की जा रही है कि इस सिंपोजियम के ठोस और व्यावहारिक नतीजे निकलेंगे, जिससे शोध संस्थानों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग मजबूत होगा और देश में जिम्मेदार एआई को बढ़ावा मिलेगा।
