PNB में 6.50 करोड़ का घोटाला गोल्ड लोन के नाम पर असली सोना गायब, पूर्व बैंक मैनेजर गिरफ्तार

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झुंझुनूं।(मीडिया)
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की नवलगढ़ शाखा में सामने आए बहुचर्चित गोल्ड लोन घोटाले ने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 6.50 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बैंक के गोल्ड लोन सेफ से 4.198 किलोग्राम सोना गायब पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले में पुलिस ने पूर्व शाखा प्रबंधक सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि जांच अभी जारी है।

पुलिस व बैंक अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला उस समय सामने आया जब बैंक द्वारा आंतरिक ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में सामने आया कि गोल्ड लोन के तहत ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए असली सोने के आभूषणों की जगह नकली या मिलावटी आभूषण रख दिए गए थे। सेफ में रखे सोने का वजन और गुणवत्ता मेल नहीं खाने पर पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ।

जांच में मुख्य आरोपी तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अमित जांगिड़ को माना गया है, जिसे पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मथुरा से गिरफ्तार किया। वहीं, उसके सहयोगी और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट संतोष कुमार सैनी को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से लंबे समय तक इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन स्वीकृत करते समय जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई। सोने की शुद्धता की जांच और सुरक्षित रखरखाव की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने असली सोना निकालकर उसकी जगह नकली आभूषण रख दिए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध है और इसमें अन्य बैंककर्मियों या बाहरी लोगों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बैंक के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सोने के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आगे और गिरफ्तारियां संभव बताई जा रही हैं।

वहीं, बैंक प्रबंधन ने भी मामले को गंभीर मानते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। इस घोटाले के उजागर होने के बाद आम ग्राहकों में भी अपने गिरवी रखे सोने की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

फिलहाल, झुंझुनूं का यह गोल्ड लोन घोटाला प्रदेश के बड़े बैंकिंग फर्जीवाड़ों में गिना जा रहा है, जिसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बैंकों की आंतरिक निगरानी व्यवस्था वाकई सुरक्षित है या नहीं।


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