ज़हरीले पानी से मौत के मामलों में केवल दो लाख रुपये के मुआवज़े को लेकर लोकगायिका और सामाजिक मुद्दों पर मुखर आवाज़ नेहा सिंह राठौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नेहा सिंह राठौर ने सरकार की मुआवज़ा नीति पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा है कि “अगर ज़हरीला पानी पीने से किसी की जान जाती है, तो उसकी कीमत क्या सिर्फ़ दो लाख रुपये है? क्या सरकार चलाने वाले लोग ख़ुद दो लाख रुपये के बदले ज़हरीला पानी पीने के लिए तैयार होंगे?”
नेहा सिंह राठौर ने वीडियो में कहा कि साफ़ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन देश के कई हिस्सों में लोग आज भी प्रदूषित और ज़हरीला पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ऐसी लापरवाही से किसी की मौत होती है, तो सरकार की ओर से दिया जाने वाला मुआवज़ा न तो पीड़ित परिवार के नुकसान की भरपाई करता है और न ही प्रशासनिक ज़िम्मेदारी तय करता है।
वीडियो में यह भी कहा गया है कि दो लाख रुपये का मुआवज़ा सरकार के लिए महज़ एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि किसी परिवार के लिए वह जीवन भर का दर्द और असुरक्षा छोड़ जाता है। नेहा सिंह राठौर ने सवाल उठाया कि क्या मुआवज़े की यह राशि तय करते समय किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने खुद को पीड़ित परिवार की जगह रखकर सोचा है?
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स ने मुआवज़े की राशि बढ़ाने और दोषी अधिकारियों पर सख़्त कार्रवाई की मांग की है, वहीं कुछ ने इसे सरकारी संवेदनहीनता का प्रतीक बताया है।
फिलहाल यह वीडियो एक बार फिर ज़हरीले पानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सरकार की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। सवाल साफ़ है—क्या इंसानी जान की कीमत सिर्फ़ मुआवज़े की एक तय रकम तक सीमित रह जाएगी, या व्यवस्था इससे आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी तय करेगी?
नेहा सिंह राठौर का वीडियो
