चार साल बाद एक पत्र, न्याय नहीं! क्या राष्ट्रीय महिला आयोग ने बिना सुनवाई बंद कर दी एक गरीब बेटी की गुहार?

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केंद्र सरकार से पुनः सुनवाई और स्वतंत्र जांच की मांग

नई दिल्ली/ पटना (बिहार)। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की कार्यप्रणाली एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है। वर्ष 2021 में दर्ज एक शिकायत को लगभग चार वर्ष बाद बंद किए जाने की सूचना मिलने के बाद अब इस पूरे मामले को दोबारा खोलने की मांग तेज हो गई है।

इस प्रकरण में 2 जुलाई 2026 को उड़ीसा हाईकोर्ट के अधिवक्ता ए. के. शर्मा एंड एसोसिएट्स (Advocate A.K. Sharma & Associates) ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), नई दिल्ली को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत आपत्ति एवं शिकायत पत्र भेजा। पत्र में आयोग द्वारा वर्ष 2021 से लंबित शिकायत को कथित रूप से बिना प्रभावी सुनवाई बंद किए जाने पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। पत्र की प्रति आयोग के शिकायत प्रकोष्ठ (Complaint Cell) को भी भेजी गई।

पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता को अंतिम निर्णय से पूर्व व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया

जबकि इस प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भी विस्तृत अभ्यावेदन भेजकर निष्पक्ष जांच तथा संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

2021 की शिकायत पर 2026 में केस बंद होने की सूचना ने NCW की प्रक्रिया पर उठाए सवा

 पीड़िता ने जब परिजन से बात कि तो उन्होंने बताया कि मामले में उपलब्ध महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर समुचित विचार नहीं किया गया। इनमें घटनास्थल के डिजिटल वीडियो, कथित प्रत्यक्षदर्शियों से जुड़े तथ्य, मौके पर मौजूद महिलाओं की भूमिका तथा पुलिस के साथ पहुंचे एक चालक के कथित व्यवहार से संबंधित सामग्री शामिल है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इतने महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध थे, तो आयोग ने उनकी जांच किस स्तर तक कराई और किन कारणों से शिकायत बंद की गई, इसका स्पष्ट उत्तर आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया।

अधिवक्ता ए. के. शर्मा का कहना है कि यह मामला केवल एक महिला की शिकायत नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के विश्वास से जुड़ा है जो पुलिस या प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध न्याय की उम्मीद में संवैधानिक संस्थाओं का दरवाजा खटखटाती हैं। उनका आरोप है कि यदि बिना समुचित सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों की व्यापक जांच के शिकायतें बंद होती हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

पीड़ित परिवार, जो स्वयं जे पी आंदोलन से जुड़ा स्वतंत्रता सेनानी परिवार  है ।  वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते उसकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। 

पत्र में सरकार से परिवार की  सुरक्षा, निष्पक्ष जांच तथा सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

शिकायत बंद करने से पहले क्या शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया?

क्या आयोग ने उपलब्ध डिजिटल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच कराई?

क्या संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य पक्षों से विस्तृत जवाब-तलब किया गया?

शिकायत बंद करने का कारणयुक्त आदेश शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया गया?

राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों और अधिवक्ताओं द्वारा भेजे गए पत्रों पर आयोग ने क्या कार्रवाई की?

मुख्य मांगें

राष्ट्रीय महिला आयोग इस शिकायत को पुनः खोलकर शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दे।

पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

उपलब्ध डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्यायिक संरक्षण और आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

आयोग शिकायत बंद करने के आधार और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

देशभर की निगाहें अब इस बात पर हैं कि क्या राष्ट्रीय महिला आयोग इन गंभीर सवालों का उत्तर देगा और न्याय के हित में इस मामले की पुनः सुनवाई कर शिकायतकर्ता का विश्वास बहाल करेगा।

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