
16 से 25 जुलाई के बीच खाते से रकम निकलने का आरोप; 19 जुलाई को मोबाइल मरम्मत के लिए चार घंटे दिया था, 1930 से लेकर पुलिस और एसपी कार्यालय तक शिकायत, अब भी कार्रवाई का इंतजार
16 से 25 जुलाई के बीच खाते से रकम निकलने का आरोप; 19 जुलाई को मोबाइल मरम्मत के लिए चार घंटे दिया था, 1930 से लेकर पुलिस और एसपी कार्यालय तक शिकायत, अब भी कार्रवाई का इंतजाररीवा। बेटी की शादी के लिए जुटाई गई रकम को लेकर एक परिवार ने जो सपने संजोए थे, वे कथित साइबर ठगी के बाद संकट में पड़ गए हैं। गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पनगढ़ी खुर्द निवासी कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि उनका मोबाइल करीब 15 दिनों तक हैंग रहा और इसी दौरान उनके यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, लालगांव शाखा के खाते से ₹4 लाख 5 हजार की रकम कथित तौर पर निकाल ली गई। पीड़ित का कहना है कि यह रकम उसकी बेटी की शादी के लिए जुटाई गई थी, जिसके लिए उसने बैंक से लोन भी लिया था।मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब 27 जुलाई 2026 की शाम करीब 5 बजे कमलेश्वर प्रसाद दैनिक खर्च के लिए भटवा स्थित यूनियन बैंक कियोस्क पर रकम निकालने पहुंचे। खाते में अपेक्षित राशि नहीं मिलने पर उन्होंने बैंक खाते की जानकारी ली तो पता चला कि खाते से बड़ी रकम निकल चुकी थी। पीड़ित के मुताबिक बैंक से रकम निकासी अथवा अन्य गतिविधियों के संबंध में मिलने वाले OTP और SMS भी उसे प्राप्त नहीं हुए, क्योंकि उसका मोबाइल पिछले करीब 15 दिनों से ठीक तरह काम नहीं कर रहा था और हैंग बताया जा रहा है।
बेटी की शादी के लिए लिया था लोन, खाते से साफ हो गई पूरी रकम
पीड़ित ने रीवा पुलिस अधीक्षक कार्यालय को दी शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया है कि खाते में मौजूद रकम उसकी बेटी की शादी के लिए थी और इस उद्देश्य से उसने लोन लेकर राशि जुटाई थी। ऐसे में कथित साइबर ठगी ने सिर्फ बैंक खाते को खाली नहीं किया, बल्कि परिवार के सामने बेटी की शादी को लेकर भी आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।पीड़ित का आरोप है कि खाते से कुल ₹4,05,000 की राशि निकाल ली गई। इस घटना के बाद उसने तत्काल बैंक से संपर्क किया और खाते को सुरक्षित कराने की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
15 दिन मोबाइल हैंग, न OTP आया न SMS—फिर खाते से कैसे निकल गई रकम?
पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू पीड़ित का मोबाइल बताया जा रहा है। कमलेश्वर प्रसाद के अनुसार घटना से पहले करीब 15 दिनों तक मोबाइल हैंग रहा। इस कारण वह मोबाइल पर सामान्य गतिविधियां भी ठीक से नहीं कर पा रहे थे। दूसरी ओर, इसी अवधि में बैंक खाते से कथित तौर पर लगातार रकम निकलती रही।पीड़ित की शिकायत में एक और महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज है। 19 जुलाई को मोबाइल सुधारने के लिए भटवा में दीपक सोनी नामक व्यक्ति को मोबाइल करीब चार घंटे के लिए दिया गया था। इसके बाद मोबाइल वापस पीड़ित के पास आ गया।यह तथ्य सामने आने के बाद मामले की तकनीकी जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, केवल मोबाइल मरम्मत के लिए दिए जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। पुलिस के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि उस अवधि में मोबाइल में क्या गतिविधियां हुईं, बैंकिंग या यूपीआई एप्लीकेशन में कोई बदलाव हुआ या नहीं और कथित ₹4.05 लाख किन खातों अथवा यूपीआई आईडी में ट्रांसफर हुए।
1930 पर शिकायत से लेकर साइबर क्राइम कार्यालय तक पहुंचा मामला
पीड़ित के मुताबिक 27 जुलाई को घटना की जानकारी मिलते ही उसने 1930 पर साइबर शिकायत दर्ज कराई और बैंक खाते को सुरक्षित कराने की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद 28 जुलाई को यूनियन बैंक में लिखित शिकायत दी गई। बैंक से स्टेटमेंट प्राप्त करने के बाद पुलिस चौकी लालगांव में भी लिखित रिपोर्ट दी गई।मामले को लेकर पीड़ित ने साइबर क्राइम कार्यालय रीवा में भी शिकायत की। इसके बावजूद जब उसे कार्रवाई की स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो उसने 3 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय और जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर भी अपनी शिकायत प्रस्तुत की।पीड़ित ने अपनी शिकायतों के साथ बैंक स्टेटमेंट, पुलिस चौकी में दी गई रिपोर्ट, आधार कार्ड, यूनियन बैंक की पासबुक और 1930 पर की गई शिकायत से संबंधित दस्तावेज संलग्न किए जाने की बात कही है।
अब बड़ा सवाल—₹4.05 लाख की मनी ट्रेल कहां तक पहुंची?
इस मामले में जांच का सबसे अहम बिंदु बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन की मनी ट्रेल है। यदि पीड़ित के खाते से यूपीआई अथवा PhonePe के माध्यम से रकम निकाली गई है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि रकम किस खाते में पहुंची, संबंधित यूपीआई आईडी किसके नाम पर थी, किस मोबाइल नंबर और डिवाइस से ट्रांजैक्शन हुए और रकम आगे किन खातों में स्थानांतरित की गई।इसके अलावा जिस अवधि में मोबाइल हैंग रहने की बात कही जा रही है, उस दौरान फोन की तकनीकी गतिविधियों की जांच भी मामले में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य यदि सुरक्षित हैं तो कथित साइबर ठगी की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सकता है।
पीड़ित की गुहार—“बेटी की शादी के लिए रखी रकम वापस दिलाई जाए”
कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी ने पुलिस अधीक्षक से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, कथित रूप से निकाली गई ₹4.05 लाख की रकम वापस दिलाने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि यह रकम उसकी बेटी की शादी के लिए थी और अब खाते से रकम निकल जाने के कारण परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।एक तरफ डिजिटल बैंकिंग को आम आदमी के लिए सुविधा और सुरक्षा का माध्यम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े करती हैं। अगर मोबाइल हाथ में रहने के बावजूद खाते से लाखों रुपये निकल जाते हैं और पीड़ित को समय रहते इसकी जानकारी तक नहीं मिलती, तो बैंकिंग सुरक्षा, डिजिटल अलर्ट और साइबर अपराध की रोकथाम की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।फिलहाल कमलेश्वर प्रसाद की निगाहें पुलिस और साइबर क्राइम टीम की जांच पर टिकी हैं। बेटी की शादी के लिए जुटाई गई ₹4.05 लाख की रकम वापस मिलेगी या नहीं, कथित साइबर ठगी के पीछे कौन है और मोबाइल हैंग होने तथा बैंक खाते से रकम निकलने के बीच क्या कड़ी है—इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।एक परिवार की जमा-पूंजी गई, अब कार्रवाई का इंतजारपीड़ित ने अपनी ओर से बैंक, 1930 साइबर हेल्पलाइन, पुलिस चौकी, साइबर क्राइम कार्यालय, एसपी कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायत पहुंचाने का दावा किया है। अब जरूरत इस बात की है कि मामले में केवल शिकायत दर्ज होने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड, यूपीआई ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कथित ठगी की पूरी कड़ी को खंगालकर दोषियों तक पहुंचा जाए और पीड़ित परिवार को उसकी रकम वापस दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास किया जाए।
