
₹50 हजार की रिश्वत के प्रकरण के बाद शासन ने लिया कड़ा फैसला, रीवा मंडल के प्रभारी अधीक्षण यंत्री तत्काल प्रभाव से निलंबित; भोपाल बनाया गया मुख्यालय
रीवा। लोक निर्माण विभाग के रीवा मंडल से इस वक्त की बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश शासन ने रीवा में पदस्थ प्रभारी अधीक्षण यंत्री एवं कार्यपालन यंत्री (सिविल) कैलाश कुमार लच्छे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन का यह निर्णय उस कार्रवाई के बाद आया है, जिसमें लोकायुक्त पुलिस द्वारा लच्छे के विरुद्ध रिश्वत से संबंधित प्रकरण में कार्रवाई की गई थी।शासन की ओर से जारी आदेश में लच्छे के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन के प्रथम दृष्टया आरोपों का उल्लेख किया गया है। मामले की जानकारी विभाग को प्राप्त होने के बाद शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की है।
11 अगस्त की लोकायुक्त कार्रवाई के बाद बढ़ा दबाव
प्रकरण की पृष्ठभूमि में 11 अगस्त 2026 की लोकायुक्त कार्रवाई बताई जा रही है। लोकायुक्त पुलिस ने कैलाश कुमार लच्छे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत के मामले में पकड़ा था। इसके बाद मामले की जानकारी शासन तक पहुंची और अब विभागीय स्तर पर भी निलंबन का आदेश सामने आ गया है।शासन के फैसले के साथ ही रीवा PWD में लच्छे की प्रशासनिक भूमिका पर तत्काल विराम लग गया है। यह कार्रवाई विभाग के भीतर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर शासन के रुख को भी स्पष्ट करती दिखाई दे रही है।
निलंबन के दौरान भोपाल रहेगा ठिकाना
निलंबन अवधि में कैलाश कुमार लच्छे का मुख्यालय मुख्य अभियंता कार्यालय, लोक निर्माण विभाग, भोपाल निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही सक्षम अनुमति के बिना निलंबन अवधि में मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी।यह आदेश मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल से जारी हुआ है। आदेश पर उप सचिव प्रदीप जैन के डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज हैं और आदेश की तारीख 17 अगस्त 2026 है।
अब विभागीय जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद शासन द्वारा की गई इस कार्रवाई को महज प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि निलंबन एक विभागीय कार्रवाई है और रिश्वत प्रकरण में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।शासन ने अपने आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों के साथ लोकायुक्त कार्यालय, विशेष पुलिस स्थापना रीवा के पुलिस अधीक्षक, रीवा PWD मंडल के संबंधित कार्यालय तथा अभिलेख के लिए भेजी हैं। ऐसे में अब पूरे मामले की आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई पर निगाहें टिक गई हैं।
