40 रिसॉर्ट विला, 6.16 करोड़ का सौदा और 1.80 करोड़ सालाना किराया! राजस्थान में IAS-IPS दंपती पर ACB का शिकंजा, सरकार ने मांगा जवाब

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सात दिन में संपत्ति का हिसाब देने का नोटिस, निजी कंपनी को सरकारी रियायतों की भी जांच

जयपुर | 3 नवंबर 2026 (एजेंसी) राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के सामने अब एक ऐसा मामला है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी IPS अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर और उनके परिवार से जुड़ी कथित 40 रिसॉर्ट विला एवं कॉटेज की खरीद का है। राजस्थान सरकार ने दोनों अधिकारियों को अचल संपत्तियों के विवरण में कथित विसंगतियों को लेकर सात दिन में जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उदयपुर के बुजड़ा और अलवर के अजाबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट से संबंधित 40 संपत्तियों की खरीद का कुल मूल्य लगभग 6.16 करोड़ रुपये बताया गया है। आरोप है कि परिवार ने ये संपत्तियां संबंधित कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदीं और बाद में इन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया। इन संपत्तियों से करीब 1.80 करोड़ रुपये सालाना किराये की आय होने की जानकारी भी सामने आई है।

सरकारी रियायतें भी जांच के घेरे में

इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू निजी कंपनी को कथित सरकारी लाभ पहुंचाने से जुड़ा है। ACB की प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिकारी के विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रहते हुए कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण संबंधी छूट, मंजूरियों और विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज का लाभ किस आधार पर मिला। 30 अक्टूबर को राज्य सरकार की अनुमति के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत प्रारंभिक जांच शुरू की गई। संबंधित कंपनी को मिलने वाली कुछ निवेश प्रोत्साहन सुविधाएं भी जांच पूरी होने तक निलंबित किए जाने की खबर है।

सात दिन में जवाब, अब सवालों के घेरे में व्यवस्था

कार्मिक विभाग के 30 अक्टूबर के नोटिस में वर्ष 2021 के बाद अर्जित अचल संपत्तियों के विवरण में कथित कमी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। दोनों अधिकारियों को सात दिन का समय दिया गया है। दोनों को APO किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई है।

जनता का सवाल: नियम आम आदमी के लिए या अधिकारियों के लिए भी?

यह मामला किसी अधिकारी को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। यदि किसी सामान्य कर्मचारी या नागरिक की संपत्ति और आय के विवरण में अंतर मिलता है तो उससे जवाब मांगा जाता है। ऐसे में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के मामले में भी वही पारदर्शिता और कानूनी कसौटी लागू होनी चाहिए।

जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी, सरकारी रियायतें किन नियमों के तहत दी गईं, क्या किसी पद का दुरुपयोग हुआ और संपत्ति संबंधी घोषणाओं में कथित विसंगतियों का वास्तविक कारण क्या है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के लिए यह मामला अपनी भ्रष्टाचार विरोधी नीति को व्यवहार में साबित करने की परीक्षा है। जनता को केवल नोटिस और जांच की घोषणा नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, समयबद्ध कार्रवाई और अंतिम निष्कर्ष जानने का अधिकार है।  क्या राजस्थान में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस का नियम छोटे-बड़े सभी पदों पर समान रूप से लागू होगा या इसका असली जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा?

नोट: इस प्रकरण में सामने आए आरोप जांचाधीन हैं। किसी भी अधिकारी के विरुद्ध दोष सिद्ध होने की स्थिति अभी नहीं मानी जा सकती। संबंधित अधिकारियों का जवाब और जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

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