रीवा। रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर जारी हलचल के बीच अब मामला दिल्ली के केंद्रीय स्तर तक पहुंच गया है। रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर परियोजना से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित होने वाले ग्रामीणों के हितों, उनकी समस्याओं और भविष्य की सुरक्षा को लेकर उचित इंतजाम किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।सांसद की इस पहल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीणों की चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। जमीन, खेती-किसानी, जलस्रोत, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े सवालों के बीच अब स्थानीय लोगों की अपेक्षाएं केंद्र सरकार के स्तर पर भी पहुंच गई हैं।
परियोजना से पहले ग्रामीणों के हितों पर हो स्पष्ट पहल
सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष यह विषय उठाया कि प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों की समस्याओं और भविष्य को ध्यान में रखकर समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय आबादी के हितों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना और उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाना जरूरी माना जा रहा है।इस मुलाकात के बाद अब क्षेत्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो सकती है कि परियोजना को लेकर उठ रही आपत्तियों, ग्रामीणों की मांगों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर संबंधित विभाग किस तरह आगे बढ़ते हैं।
रोझौही में विरोध की वजह केवल परियोजना नहीं, भविष्य की चिंता भी
रीवा जिले की सिरमौर तहसील के रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर ग्रामीणों के बीच असहमति सामने आई है। स्थानीय स्तर पर लोगों ने अपनी जमीन, आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों और क्षेत्र के पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।अक्टूबर की शुरुआत में परियोजना स्थल पर भू-तकनीकी जांच के लिए ड्रिलिंग मशीनें पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताया था। इसके बाद जांच संबंधी गतिविधियों को लेकर विवाद बढ़ा और ग्रामसभा की भूमिका, ग्रामीणों की सहमति तथा प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए।ग्रामीणों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का समाधान और परियोजना से जुड़ी जानकारी की स्पष्टता अब इस पूरे घटनाक्रम के महत्वपूर्ण पहलू बन गए हैं।
विरोध से जल सत्याग्रह तक पहुंचा आंदोलन
परियोजना के विरोध में ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन के साथ जल सत्याग्रह का रास्ता भी अपनाया। 28 अक्टूबर को सत्याग्रह के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। आंदोलन के बीच प्रशासन की ओर से परियोजना संबंधी गतिविधियों को लेकर कुछ समय तक कार्रवाई नहीं किए जाने का मौखिक आश्वासन दिए जाने की बात भी सामने आई।इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि ग्रामीणों की आशंकाओं का समाधान किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। आंदोलनकारी पक्ष की मांगों, प्रशासन के रुख और परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

