“कैंसर की फैक्ट्री नहीं चाहिए”, “विकास चाहिए, विनाश नहीं” और “परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ” के नारों से गूंजा पनगड़ी
दिनांक: 20 अक्टूबर 2026 | रीवा, मध्य प्रदेश। प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध अब व्यापक रूप लेने लगा है। यह आंदोलन अब केवल प्रस्तावित स्थल रोझौही अथवा सरई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आसपास के गांवों में भी इसके विरोध की आवाज उठने लगी है। लोग अपने जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। इसी कड़ी में पनगड़ी ग्राम पंचायत में भी ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस परियोजना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने “विनाश नहीं, विकास चाहिए”, “न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए” और “परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारे लगाते हुए स्वास्थ्य, पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित परियोजना को रद्द करने की अपील की।यह प्रदर्शन पनगड़ी ग्राम पंचायत के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सरपंच प्रत्याशी अमित शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित लवकुश पांडेय, सुरेश सोंधिया तथा यज्ञभान कुशवाहा समेत अन्य स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
लाखों जिंदगियों को खतरे में न डाले सरकार
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मांग की कि कुछ लोगों के मुआवजे अथवा व्यक्तिगत हितों के लिए व्यापक जनसमुदाय की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि प्रस्तावित परियोजना का प्रभाव केवल रोझौही या सरई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी इससे जुड़ी आशंकाओं को लेकर चिंतित हैं।ग्रामीणों ने सौर और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
वर्ष 2024 के शोध का हवाला देकर कैंसर के खतरे पर जताई चिंता
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने करेंट एनवायरनमेंट मैगजीन में वर्ष 2024 में प्रकाशित बताए जा रहे एक शोध का हवाला देते हुए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास कैंसर के मामलों को लेकर चिंता जाहिर की। उनके दावे के अनुसार, 17 देशों के 175 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास किए गए अध्ययन में कैंसर के मामलों में वृद्धि का उल्लेख किया गया है।प्रदर्शनकारियों ने कुल कैंसर के मामलों में 5 से 10 प्रतिशत, ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर में 9 प्रतिशत तथा थायराइड कैंसर में 17 प्रतिशत तक वृद्धि के आंकड़ों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि पनगड़ी गांव प्रस्तावित परियोजना स्थल से लगभग 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए संबंधित शोध का मूल प्रकाशन, उसकी शोध-पद्धति और निष्कर्षों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। केवल इन आंकड़ों के आधार पर प्रस्तावित संयंत्र से कैंसर होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कैंसर से अपनों को खो चुके परिवारों ने साझा किया दर्द
उन्होंने भावुक होकर कहा कि क्षेत्र में कैंसर को लेकर पहले से ही लोगों के मन में चिंता है और ऐसे में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर उनकी आशंकाओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने परियोजना को किसी भी कीमत पर स्थापित नहीं किए जाने की मांग की।वहीं, पनगड़ी निवासी सुरेश कुमार सोंधिया ने बताया कि उनके 30 वर्षीय बेटे को कैंसर की अंतिम अवस्था में बीमारी का पता चला था, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। बेटे को खोने का दर्द साझा करते हुए उन्होंने इस परियोजना को रद्द करने की मांग की।इन परिवारों के अनुभवों ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं का समाधान किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
परियोजना निरस्त करने की उठी मांग
पनगड़ी में हुए इस प्रदर्शन के बाद प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध का एक और स्वर सामने आया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन से स्थानीय लोगों की चिंताओं, पर्यावरणीय प्रभावों तथा स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।ग्रामीणों ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास के साथ आम नागरिकों के जीवन, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना को निरस्त करने की मांग दोहराई।

