वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जनसुनवाई में शामिल नहीं हुए CEO रायपुर कर्चुलियान और तहसीलदार सेमरिया, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के दिए निर्देश
रीवा। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई मंगलवार को सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रही। जिलेभर से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे 454 आवेदकों की फरियाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के सामने पहुंची। लोगों ने जमीन, राजस्व, पेंशन, सरकारी योजनाओं, स्थानीय समस्याओं और अन्य मामलों से संबंधित आवेदन अधिकारियों के समक्ष रखे।कलेक्टर ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का सात दिन के भीतर निराकरण किया जाए और कार्रवाई का प्रतिवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाए। यानी अब आवेदन लेकर जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी, बल्कि उसके निराकरण की रिपोर्ट भी समय-सीमा के भीतर देनी होगी।
जनता की शिकायतों पर कलेक्टर का सीधा फोकस
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने अलग-अलग विभागों से संबंधित आवेदनों को सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसुनवाई में आने वाले आवेदनों को गंभीरता से लिया जाए और पात्र मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि आम लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गैरहाजिरी पर दो अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
जनसुनवाई में अधिकारियों की मौजूदगी और जवाबदेही को लेकर भी कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनसुनवाई में शामिल नहीं होने पर CEO जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान और तहसीलदार सेमरिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।कलेक्टर के इस निर्देश से साफ है कि जनसुनवाई में संबंधित अधिकारियों की भागीदारी को महज औपचारिकता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
अब सात दिन की समय-सीमा में जवाब देना होगा
जनसुनवाई में मिले 454 आवेदन अब संबंधित विभागों और अधिकारियों के लिए जिम्मेदारी का विषय हैं। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सात दिन के भीतर आवेदन का निराकरण कर ऑनलाइन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों के निराकरण में समयबद्धता लाना और प्रशासनिक कार्रवाई को रिकॉर्ड पर लाना है। जनसुनवाई में उमड़ी फरियादियों की संख्या और कलेक्टर के सख्त निर्देशों ने एक बात स्पष्ट कर दी है—अब शिकायत सिर्फ सुनी नहीं जाएगी, उसके समाधान की समय-सीमा भी तय होगी।
