विश्व प्रसिद्ध दरगाह या मौत का गलियारा?

Spread the love

4-5 फीट की गलियों में आसमान छूती इमारतें… आखिर किसकी मेहरबानी से दफन हो रहे सुरक्षा के नियम?

खबर वन न्यूज विशेष | अजमेर

यह तस्वीरें किसी अव्यवस्थित बस्ती की नहीं, बल्कि विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़े लाखन कोठरी क्षेत्र की हैं, जहां हर वर्ष लाखों जायरीन देश-विदेश से आते हैं। लेकिन इन गलियों को देखकर एक सवाल हर नागरिक के मन में उठता है—क्या यह आस्था का मार्ग है या किसी संभावित हादसे का इंतजार करता हुआ रास्ता?

चार से पांच फीट चौड़ी गलियों में लगातार ऊंचे-ऊंचे व्यावसायिक भवन और होटल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं। नीचे टूटी सड़कें, खुली नालियां, ऊपर बिजली के तारों का जाल और बीच में मुश्किल से गुजरता रास्ता। यदि आज यहां आग लग जाए, सिलेंडर फट जाए या भूकंप जैसी आपदा आ जाए, तो क्या दमकल की गाड़ी इन गलियों तक पहुंच पाएगी?

अजमेर हाल के होटल अग्निकांड की पीड़ा अभी भूला भी नहीं है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, प्रशासन ने सुरक्षा की बातें भी कहीं। लेकिन इन तस्वीरों को देखकर लगता है कि सबक हादसे से नहीं, सिर्फ उसकी खबरों से लिया गया था।

सबसे बड़ा प्रश्न जिम्मेदार विभागों से है।

क्या नगर निगम ने इन निर्माणों का निरीक्षण किया?

क्या अजमेर विकास प्राधिकरण ने इन भवनों की स्वीकृतियों का सत्यापन किया?

क्या अग्निशमन विभाग ने फायर सेफ्टी मानकों की जांच की?

या फिर फाइलों में सब कुछ “संतोषजनक” है और जमीन पर हालात भगवान भरोसे?

विडंबना यह है कि आम नागरिक अपने मकान में छोटा-सा बदलाव करे तो नोटिस पहुंच जाता है, लेकिन यदि किसी संवेदनशील क्षेत्र में लगातार बड़े व्यावसायिक निर्माण हो रहे हों, तो व्यवस्था की आंखें मानो बंद हो जाती हैं। जनता पूछ रही है—क्या नियम केवल कमजोर लोगों के लिए हैं?

स्थानीय जनता जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, अजमेर विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग करती है कि दरगाह क्षेत्र के सभी बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों और होटलों का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। यदि किसी निर्माण में भवन उपविधियों, अग्नि सुरक्षा या अन्य आवश्यक मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।

अंतिम सवाल जनता का

अजमेर प्रशासन से जनता सिर्फ इतना जानना चाहती है—क्या कार्रवाई आज होगी, या फिर किसी अगले हादसे के बाद वही घिसा-पिटा बयान सुनने को मिलेगा कि “जांच के आदेश दे दिए गए हैं”?

क्योंकि इतिहास बताता है—हादसे अचानक नहीं होते, वे वर्षों की अनदेखी का परिणाम होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *