रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट मामला: कमिश्नर ने समाजसेवियों का ज्ञापन मप्र शासन को भेजा

Spread the love

28 पृष्ठ की विस्तृत रिपोर्ट और 1,000 से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन पर अग्रिम कार्रवाई की मांग, पर्यावरण और सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवाल

जयपुर/भोपाल/ रीवा, 30 जून। मध्यप्रदेश के रीवा जिले की सिरमौर तहसील के रुझौही–क्योटी क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा के न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री के नाम समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा 23 जून को रीवा संभाग के कमिश्नर के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन को अब अग्रिम कार्रवाई के लिए मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को भेज दिया गया है।

समाजसेवियों ने ज्ञापन में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए चयनित स्थल पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने की मांग की है। ज्ञापन के साथ 28 पृष्ठ की विस्तृत रिपोर्ट संलग्न की गई है, जिसमें परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़े पर्यावरणीय, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त 35 पृष्ठों में एक हजार से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त समर्थन पत्र भी संलग्न किए गए हैं।

यहभी पढ़ें: –

ज्ञापन सौंपने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, संजीव पांडेय, शिवानंद तिवारी, अधिवक्ता विष्णु तिवारी, सुनील मिश्रा सहित अन्य समाजसेवी और स्थानीय नागरिक शामिल रहे।

रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर हुए प्रमुख परमाणु हादसों, विशेष रूप से 1986 के चेर्नोबिल हादसे और 2011 के फुकुशिमा दाइची दुर्घटना का उल्लेख करते हुए परमाणु परियोजनाओं से जुड़े संभावित जोखिमों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment), पारदर्शी जनसुनवाई तथा वैज्ञानिक आधार पर स्थल चयन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

ज्ञापन में यह भी चिंता व्यक्त की गई है कि रीवा और विंध्य क्षेत्र पहले से ही जल संकट और कृषि संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि सभी आवश्यक मानकों का पालन किए बिना परियोजना स्थापित की जाती है तो भविष्य में पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि ज्ञापन में प्रस्तुत अनेक दावे और आशंकाएं समाजसेवियों एवं स्थानीय नागरिकों के विचार हैं। इन पर शासन अथवा संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि या अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।

अब यह मामला मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के समक्ष पहुंच चुका है। ऐसे में निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस ज्ञापन पर क्या निर्णय लेता है और परियोजना के संबंध में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *