रांची। सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम को सड़क डिवाइडर और स्ट्रीटलाइट के खंभों पर कम ऊंचाई पर लगाए गए विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग्स और प्लैकार्ड्स तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डिवाइडर के खंभों पर लगाए जाने वाले किसी भी विज्ञापन का निचला हिस्सा सड़क की सतह से कम से कम 12 फीट की ऊंचाई पर होना चाहिए।
जस्टिस आनंदा सेन की पीठ ने यह निर्देश झारखंड स्टेट आउटडोर एडवरटाइजिंग एसोसिएशन बनाम झारखंड राज्य व अन्य तथा संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान दिया। ये याचिकाएं विज्ञापन एजेंसियों की ओर से रांची शहर में होर्डिंग्स, मोनोपोल और यूनिपोल हटाने संबंधी नगर निगम के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थीं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास ने दलील दी कि सभी होर्डिंग्स को सामान्य तौर पर खतरनाक नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि अधिकारियों को ऐसे विशिष्ट विज्ञापन बोर्डों की पहचान करनी चाहिए, जो वास्तव में सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
वहीं, रांची नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि शहर में लगाए गए कई मोनोपोल, यूनिपोल, होर्डिंग्स, बिलबोर्ड और प्लैकार्ड वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं और इससे दुर्घटनाओं, चोट तथा जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है। निगम ने मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने याचिका के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और तस्वीरों का अवलोकन करते हुए कुछ विज्ञापनों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने एक यूनिपोल का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका ढांचा सड़क की ओर काफी आगे तक निकला हुआ था। वहीं, डिवाइडर पर लगे स्ट्रीटलाइट के खंभों पर कम ऊंचाई पर लगाए गए विज्ञापन दोपहिया वाहन चालकों के लिए टकराव का खतरा पैदा कर सकते हैं।
पीठ ने टिप्पणी की कि सड़क के बीच में बिजली के खंभों पर इतनी कम ऊंचाई पर विज्ञापन बोर्ड लगाना राहगीरों के लिए खतरा है और ये ब्लाइंड स्पॉट भी पैदा कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सड़क डिवाइडर के खंभों पर 12 फीट से कम ऊंचाई पर लगे सभी विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग्स और प्लैकार्ड तत्काल हटाए जाएं। यदि ऐसे विज्ञापन लगाए जाने हैं तो उन्हें निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई से ऊपर स्थापित करना होगा।
अदालत ने रांची नगर निगम को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
मामले का विवरण:
वाद संख्या— डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 2560/2026, साथ में डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 2508/2026
पीठ— जस्टिस आनंदा सेन
निर्देश की तिथि— 11 अगस्त 2026
