मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, दोनों सदनों से 12 विधेयक पारित

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नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 20 जुलाई से शुरू हुए 25 दिवसीय सत्र में कुल 19 बैठकें हुईं। इस दौरान संसद के दोनों सदनों ने मिलकर 12 विधेयक पारित किए। लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता करीब 39 प्रतिशत रही।

सत्र के दौरान लोकसभा में 11 और राज्यसभा में दो विधेयक पेश किए गए। लोकसभा ने कुल 12 तथा राज्यसभा ने भी 12 विधेयक पारित किए। दोनों सदनों से पारित विधेयकों में लोक परीक्षा, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, MSME, बैंकिंग रिकॉर्ड, अधिकरण सुधार, खनन और केरल के नाम परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल रहे।

लोक परीक्षा कानून में सख्ती का प्रावधान

सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। इसका उद्देश्य प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विधेयक में अपराधों की जांच दो महीने और ट्रायल तीन महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने तथा विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देने की व्यवस्था है। विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है।

वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण

राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए वंदे मातरम को 1971 के संबंधित कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। जानबूझकर राष्ट्रीय गीत गाने से रोकने या इसे गा रही सभा में बाधा उत्पन्न करने को अपराध बनाने का प्रस्ताव इसमें शामिल है।

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे सख्त

जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 में देर से पंजीकरण की प्रक्रिया को सख्त किया गया है। एक वर्ष के बाद और दो वर्ष तक पंजीकरण के लिए सक्षम कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी, जबकि दो वर्ष से अधिक देरी होने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी होगी।

MSME और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अहम बदलाव

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 में MSME के नि:शुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तथा वित्त तक पहुंच आसान बनाने का प्रावधान है। विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों के तेजी से निपटारे और कुछ उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का भी प्रस्ताव है।

वहीं, बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 में बैंक रिकॉर्ड की परिभाषा को आधुनिक बनाया गया है। इसके तहत भौतिक रिकॉर्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड को भी कानूनी दायरे में शामिल किया गया है।

केरल का नाम ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव

केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 के जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव किया गया है।

इसके अलावा अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 में अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, योग्यता तथा सेवा शर्तों में सुधार और राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रावधान है। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर और पूर्वानुमेय बनाना है।

दो अध्यादेशों को विधेयकों से बदला गया

सत्र के दौरान राष्ट्रपति द्वारा मानसून सत्र से पहले जारी किए गए उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 और आय-कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को प्रतिस्थापित करने वाले विधेयकों पर भी संसद ने विचार कर उन्हें पारित किया।

विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को जांच और रिपोर्ट के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया।

सत्र के दौरान वर्ष 2022-23 की अतिरिक्त अनुदान मांगों पर भी विचार किया गया। संबंधित विनियोग विधेयक को लोकसभा ने 4 अगस्त को पारित किया, जिसे राज्यसभा ने 6 अगस्त को लौटा दिया।

सत्र के प्रमुख आंकड़े: 25 दिन की अवधि, 19 बैठकें, 12 विधेयक दोनों सदनों से पारित, लोकसभा उत्पादकता 19% और राज्यसभा उत्पादकता करीब 39%।

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