जयपुर। राजस्थान में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए करीब 13 लाख पट्टों की जांच जुलाई माह से शुरू होने की संभावना है। स्वायत्त शासन विभाग इस संबंध में तैयारी कर रहा है। सरकार का कहना है कि विभिन्न निकायों में पट्टों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर जांच अभियान चलाया जाएगा।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि प्रदेश के कई शहरी निकायों में पट्टों को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कुछ स्थानों पर हुई जांच में 400 से अधिक फर्जी पट्टे सामने आने का दावा किया गया है। ऐसे में अब सभी निकायों में जारी पट्टों की जांच कराई जाएगी ताकि नियमों के विपरीत जारी किए गए पट्टों की पहचान की जा सके।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में विभाग में लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई है। हालांकि जुलाई तक विभाग को अतिरिक्त प्रशासनिक एवं राजस्व अधिकारियों की उपलब्धता होने की उम्मीद है। इसके बाद जांच को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इधर, नगरीय विकास विभाग एक नया आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसके तहत तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि से अप्रंजीकृत पड़े पट्टों को निरस्त किया जा सकेगा। साथ ही ऐसे मामलों में निरस्तीकरण का कारण भी स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य फर्जी या नियम विरुद्ध जारी किए गए पट्टों की पहचान करना है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से उठाया जा रहा है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रस्तावित जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
