नई दिल्ली/जयपुर। देश की राजनीति में अहम माने जाने वाले राज्यसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने राजस्थान समेत 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा कर दी है। इन सीटों पर वर्तमान सांसदों का कार्यकाल जून और जुलाई 2026 में समाप्त हो रहा है। राजस्थान में तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिससे प्रदेश की सियासत में भी नई सक्रियता दिखाई देने लगी है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 1 जून 2026 को जारी की जाएगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी, जबकि 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा तथा उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक पूर्ण कर ली जाएगी।
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतपत्र पर प्राथमिकता अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया विशेष बैंगनी रंग का स्केच पेन ही मान्य होगा। किसी अन्य पेन का उपयोग करने पर मत अमान्य माना जा सकता है। आयोग ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की भी बात कही है।
राजस्थान की जिन तीन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें वर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, राजेन्द्र गहलोत और रवनीत सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में राजनीतिक समीकरणों का दौर शुरू हो गया है। विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए चुनाव परिणाम को लेकर अभी से चर्चाएं तेज हैं।
राजस्थान के अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक और मिजोरम की सीटों पर भी चुनाव होंगे। कर्नाटक से वरिष्ठ नेता और का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जबकि मध्य प्रदेश से तथा झारखंड से का कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है। ऐसे में कई राज्यों में यह चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का विषय बनने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी राज्यसभा चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं बल्कि आने वाले समय की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत भी साबित हो सकता है।
