“कमरों में कैद न रह जाए कोई पक्षी, वरना 40 दिन की छुट्टियां बन सकती हैं मौत का कारण”
अजमेर: गर्मी की छुट्टियों के बीच एक मानवीय और संवेदनशील अपील सोशल मीडिया व शिक्षण संस्थानों में तेजी से साझा की जा रही है। स्कूलों में 15/16 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने जा रहे हैं और लगभग 40 दिनों तक विद्यालय बंद रहेंगे। ऐसे में प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और विद्यालय स्टाफ से विशेष आग्रह किया गया है कि स्कूल बंद करते समय हर कमरे, खिड़की और दरवाजे को अच्छी तरह जांच लें ताकि कोई पक्षी अंदर फंसकर न रह जाए।
अपील में कहा गया है कि अक्सर कबूतर, गौरैया या अन्य छोटे पक्षी खुले कमरों में घोंसला बना लेते हैं या अंदर उड़कर चले जाते हैं। यदि स्कूल बंद करते समय वे अंदर रह गए तो लंबे समय तक भोजन और पानी नहीं मिलने से उनकी दर्दनाक मौत हो सकती है।
यह संदेश केवल एक सावधानी नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बनकर सामने आया है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इंसान के साथ-साथ धरती पर हर जीव का समान अधिकार है और छोटी-सी सतर्कता कई बेजुबान जिंदगियों को बचा सकती है।
शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूल बंद करने से पहले सभी कमरों, प्रयोगशालाओं, स्टोर और बरामदों की जांच अवश्य की जाए। साथ ही परिसर में पक्षियों के लिए पानी के पात्र रखने की भी अपील की गई है।
“जियो और जीने दो”
मानवता तभी सार्थक है, जब हमारी संवेदनाएं बेजुबान जीवों तक भी पहुंचें।
