भारत का युवा विरोधी नहीं, राष्ट्र निर्माण की ताकत है !

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संपादकीय- देवेन्द्र सक्सैना

“शहीदों के सपनों का भारत आखिर कब बनेगा?”

भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है।
यह वही भारत है जहाँ करोड़ों युवा बड़े सपने लेकर पढ़ाई करते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, नौकरी की तलाश में संघर्ष करते हैं और देश को आगे बढ़ाने का सपना देखते हैं। लेकिन इसी भारत में एक ऐसा वर्ग तेजी से बढ़ रहा है जो व्यवस्था से निराश दिखाई देता है। यह निराशा केवल बेरोजगारी की नहीं, बल्कि व्यवस्था में बढ़ती असमानता, भ्रष्टाचार, पक्षपात और जवाबदेही की कमी की है।

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर “कॉकरोच पार्टी” जैसे शब्दों और अभियानों ने अचानक चर्चा पकड़ी। पहली नजर में यह केवल व्यंग्य या ट्रेंड जैसा लगता है, लेकिन इसकी गहराई में जाएं तो यह युवाओं के भीतर जमा उस आक्रोश का प्रतीक दिखाई देता है जो वर्षों से व्यवस्था के प्रति बढ़ता जा रहा है।
जब कोई युवा RTI लगाता है, भ्रष्टाचार उजागर करता है, अवैध निर्माण पर सवाल उठाता है, भर्ती घोटालों की जानकारी सामने लाता है या प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाता है, तब उसे सहयोग के बजाय अक्सर दबाव, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ता है। यही स्थिति समाज में असंतोष को जन्म देती है।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत — जनता की आवाज

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लोकतंत्र की असली ताकत चुनाव नहीं, बल्कि जनता का विश्वास होता है।
यदि वही विश्वास टूटने लगे, तो किसी भी राष्ट्र की नींव कमजोर होने लगती है। आज देश का आम नागरिक यह महसूस करने लगा है कि कानून और नियम सबके लिए समान रूप से लागू नहीं होते। प्रभावशाली लोगों के लिए व्यवस्था नरम दिखाई देती है, जबकि आम नागरिक को छोटी-छोटी बातों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

यह असमानता केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असंतुलन का कारण बनती जा रही है।
देश में लगातार सामने आ रहे भर्ती परीक्षा पेपर लीक, नगर निकायों में अनियमितताएं, अवैध निर्माण, महिला सुरक्षा के मामले, भ्रष्टाचार के आरोप और कार्रवाई में देरी जैसी घटनाएं युवाओं के मन में यह प्रश्न खड़ा करती हैं कि आखिर ईमानदारी से संघर्ष करने वाले व्यक्ति को न्याय कब मिलेगा।

जब मेहनत और योग्यता से अधिक महत्व पहचान और पहुंच को मिलने लगे, तब युवाओं का मनोबल टूटने लगता है। यह स्थिति किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए खतरनाक होती है।

“शहीदों के सपनों का भारत आखिर कब बनेगा?”

शहीद ने कभी केवल अंग्रेजों से आज़ादी का सपना नहीं देखा था। उनका सपना ऐसे भारत का था जहाँ युवा निर्भय होकर सच बोल सके, अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सके और व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह हो।
उन्होंने कहा था कि —

“क्रांति की तलवार विचारों की शान से तेज होती है।”

आज वही विचार देश के युवाओं के भीतर सवाल बनकर उठ रहे हैं।

यदि आज का युवा भ्रष्टाचार, पेपर लीक, प्रशासनिक लापरवाही और असमानता पर सवाल पूछ रहा है, तो उसे राष्ट्रविरोध नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इतिहास गवाह है कि हर बड़े परिवर्तन की शुरुआत युवाओं की आवाज से ही हुई है।

भगत सिंह और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत की कल्पना की थी, वह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह राष्ट्र व्यवस्था का सपना था।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकारें युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय समझें। क्योंकि जब राष्ट्र का युवा सवाल पूछता है, तब वह व्यवस्था गिराने नहीं, बल्कि उसे सुधारने की कोशिश कर रहा होता है।

सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन नहीं, जनता की अदालत बन चुका है

सरकारों को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर उठ रही हर आवाज विरोध नहीं होती।
आज सोशल मीडिया आम जनता की शिकायत, जागरूकता और जनदबाव का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। कई बार वही वीडियो, वही पोस्ट और वही जनआंदोलन प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर करते हैं जिन मुद्दों को वर्षों तक अनदेखा किया गया।

यदि कोई युवा भ्रष्टाचार उजागर करता है, सूचना के अधिकार का उपयोग करता है या जनहित के मुद्दे उठाता है, तो उसे प्रताड़ित करने के बजाय सम्मान और सुरक्षा दी जानी चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार है।

देश को बांटने वाली सबसे बड़ी ताकत — अन्याय

आज समाज में धर्म, जाति और भाषा के नाम पर बढ़ती दूरियों की चर्चा होती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि किसी भी समाज को सबसे ज्यादा नुकसान अन्याय और असमानता पहुंचाते हैं।

जब लोगों को न्याय नहीं मिलता, तब व्यवस्था के प्रति गुस्सा पैदा होता है।
जब मेहनती युवा अवसरों से वंचित रह जाता है और भ्रष्ट लोग व्यवस्था पर हावी दिखाई देते हैं, तब समाज के भीतर विभाजन बढ़ने लगता है।

इसलिए यदि राष्ट्र को मजबूत बनाना है, तो सबसे पहले व्यवस्था को निष्पक्ष बनाना होगा।

अब केवल भाषण नहीं, ठोस सुधार की जरूरत

समय की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसी पारदर्शी व्यवस्था तैयार करें जिसमें सोशल मीडिया और जनशिकायतों पर तय समय सीमा में कार्रवाई अनिवार्य हो। प्रत्येक जिले में ऐसी डिजिटल जनसुनवाई प्रणाली विकसित की जानी चाहिए जहाँ जनता यह देख सके कि उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई।

जरूरी सुधार

भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक करने वालों पर कठोर दंड

RTI कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों की सुरक्षा

नगर निकायों और प्रशासनिक विभागों में जवाबदेही

भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई

सोशल मीडिया शिकायतों की सार्वजनिक मॉनिटरिंग

महिलाओं की सुरक्षा मामलों में समयबद्ध न्याय

युवा विरोधी नहीं, राष्ट्र निर्माण की ताकत हैं

भारत का युवा आज भी देशविरोध नहीं चाहता।
वह केवल यह चाहता है कि उसकी मेहनत का सम्मान हो, उसकी आवाज सुनी जाए और कानून सबके लिए समान हो।

सरकार यदि इस भावना को समझ लेती है, तो यही युवा भारत को दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बना सकता है।

आज देश को नारों से ज्यादा सुधार की जरूरत है।
क्योंकि इतिहास गवाह है —

“जब युवा जागता है, तब राष्ट्र बदलता है।
और जब व्यवस्था जनता की आवाज सुनती है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।”

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