अजमेर:नगर निगम निवर्तमान पार्षदों ने निगम प्रशासन पर लगाए आरोप,जनता फाइलों में अटकी, ‘खास’ कामों पर मुहर

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अजमेर। नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर शहर में बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। समस्त पूर्व एवं निवर्तमान पार्षदों ने निगम प्रशासन पर आरोप लगाया है कि जनहित से जुड़े आवश्यक कार्यों में लगातार निगम अधिकारियों द्वारा लापरवाही और अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षदों के अनुसार विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवारा पशुओं की समस्या, आवासीय नक्शों की स्वीकृति तथा धारा 69A के पट्टों जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं।

 आरोप है कि अधिकारियों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के काम अटक रहे हैं और उन्हें बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिल रहा।

इसी बीच अखबारों की सुर्खियों में नगर निगम पर अवैध रूप से नक्शे जारी करने के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। जहां आवासन मंडल वैशाली नगर,अजमेर की कॉलोनियों में अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से—जो निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं उनमें व्यवसायिक और बहुमंजिला निर्माणों के नक्शे स्वीकृत कर दिए गए।

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इससे निगम पर यह सवाल खड़ा हो गया है कि जिन मामलों में निगम का अधिकार ही नहीं, वहां नक्शे किस आधार पर और किसके आदेश से पास किए गए?

 वहीं दूसरी ओर जिन लोगों को वैध रूप से पट्टे और नक्शे मिलने चाहिए, उनके कार्य फाइलों में अटके पड़े हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शहर में जनता के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि अजमेर नगर निगम पर लगातार भ्रष्टाचार और जनता के काम नहीं होने के आरोप लगने के बावजूद, न तो सरकार और न ही कोई वैधानिक संस्था इन अधिकारियों पर प्रभावी लगाम कसने में सफल हो पाई?

 यह सवाल पिछले दो दशकों से अजमेर की जनता के बीच गूंज रहा है। मजबूर और लाचार नागरिक खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे, लेकिन दबी आवाज में अपनी पीड़ा जरूर व्यक्त कर रहे हैं।

इस संबंध में 28 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे संभागीय आयुक्त एवं प्रशासक को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने तथा लंबित कार्यों के समयबद्ध निस्तारण की मांग की गई है।

पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो समस्त पूर्व एवं निवर्तमान पार्षद जनता के साथ मिलकर जिला कलेक्टर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। 

नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर उठते आए सवाल अब प्रशासन के लिए चुनौती हैं । अब शहर की जनता को इंतजार है प्रशासन,शासन के बिना मर्जी कुछ करने में सक्षम है ? क्या यह आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी या इसे भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा ।

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