जयपुर/नई दिल्ली | सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे के निर्धारण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी MBBS छात्र की मृत्यु होने पर उसे केवल बेरोजगार छात्र मानकर मुआवजा निर्धारित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में छात्र के उज्ज्वल भविष्य और संभावित आय को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
मामला एक 23 वर्षीय अंतिम वर्ष के MBBS छात्र की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु से संबंधित था। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने पहले मृतक के परिवार को लगभग ₹40.90 लाख का मुआवजा प्रदान किया था। बीमा कंपनी का तर्क था कि मृतक छात्र की कोई वास्तविक आय नहीं थी, इसलिए भविष्य में डॉक्टर बनने और आय अर्जित करने की संभावना के आधार पर मुआवजा नहीं बढ़ाया जा सकता।
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हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंढ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मृतक अंतिम वर्ष का MBBS छात्र था और उसके डॉक्टर बनने की प्रबल संभावना थी। इसलिए केवल वर्तमान आय को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं होगा।
न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए मृतक की काल्पनिक आय ₹50,000 प्रतिमाह निर्धारित की तथा भविष्य की संभावनाओं (Future Prospects) को भी जोड़ा। इसके परिणामस्वरूप मृतक के परिवार को देय मुआवजा बढ़ाकर ₹78.30 लाख कर दिया गया।
यह निर्णय उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके प्रतिभाशाली और पेशेवर शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों की दुर्घटनाओं में असामयिक मृत्यु हो जाती है। अदालत का संदेश स्पष्ट है कि ऐसे युवाओं का मूल्यांकन केवल उनकी तत्काल आय से नहीं, बल्कि उनके संभावित भविष्य और समाज में योगदान की क्षमता के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
