नई दिल्ली, 22 मार्च 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष की स्थिति और इसके प्रभावों के मद्देनजर राहत उपायों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वैश्विक स्थिति के साथ-साथ भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और देश की समग्र आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न कदम उठाने पर विचार किया गया।
बैठक में खाद्य सुरक्षा, उर्वरकों की उपलब्धता, पेट्रोलियम, बिजली और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर चिंताओं को साझा किया गया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर चर्चा की, ताकि किसानों को भविष्य में कोई संकट न हो। साथ ही, राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने की अपील की गई कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी से बचा जा सके।
इसे भी पढ़ें:
आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से विचार किया गया। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि इस संकट से निपटने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण के तहत सरकार के सभी अंगों को एकजुट होकर काम करना होगा। इसके लिए मंत्रियों और सचिवों का एक समर्पित समूह बनाया जाएगा जो राहत उपायों को प्रभावी रूप से लागू करेगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर कोई कमी नहीं होगी, और आगामी खरीफ मौसम के लिए किसानों को खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पेट्रोकेमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए आयात के स्रोतों में विविधता लाने के उपाय भी उठाए जाएंगे।
भारत में बिजली संकट से बचने के लिए सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी।
प्रधानमंत्री ने समन्वय और तेजी से कार्रवाई के लिए राज्य सरकारों से भी सक्रिय सहयोग की उम्मीद जताई, ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो और राहत कार्यों में कोई कमी न आए।
