नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वेदों के शाश्वत ज्ञान को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम का पाठ किया और भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। पीआईबी दिल्ली द्वारा सुबह 10:15 बजे जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा— “ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छंदांसि यस्य पूर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।’’ इस श्लोक में संसार की तुलना एक शाश्वत पीपल के वृक्ष से की गई है, जिसकी जड़ें ऊपर और शाखाएँ नीचे हैं तथा जिसके पत्ते वेद हैं। जो इस जीवन-वृक्ष के तत्व को समझ लेता है, वही वेदों का सच्चा ज्ञाता कहलाता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ज्ञान का दीपक केवल अज्ञानता का अंधकार दूर नहीं करता, बल्कि समस्त विश्व को आलोकित करता है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती को इस दिव्य ज्ञान परंपरा का जीवंत उदाहरण बताते हुए उनके योगदान को स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी यही संदेश साझा करते हुए भारतीय संस्कृति और वेदों की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
