जयपुर । राजस्थान पुलिस भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), जयपुर ने एफआईआर दर्ज की है। यह मामला जालौर जिले में हुई पुलिस भर्तियों से जुड़ा है, जहाँ जांच में डमी कैंडिडेट बैठाने, फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए नौकरी हासिल करने और संगठित साजिश के पुख्ता संकेत मिले हैं।
यह एफआईआर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एटीएस/एसओजी), राजस्थान के निर्देश पर तथा पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड, राजस्थान के पत्र दिनांक 31 जुलाई 2024 के अनुपालन में दर्ज की गई। जालौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वयं परीक्षा न देकर डमी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलवाई और बाद में उन्हीं के नाम पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
जांच में वर्ष 2021 की भर्ती सूची में शामिल आठ अभ्यर्थियों—प्रदीप कुमार, अनिल कुमार, संजय कुमार, धनराज, श्याम शर्मा, संदीप कुमार, पंकज कुमार और सोहनलाल—के दस्तावेज़ों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। भर्ती के समय प्रस्तुत दस्तावेज़ और वर्तमान रिकॉर्ड में अंतर सामने आने के बाद मामले को आपराधिक प्रकृति का मानते हुए एसओजी को सौंपा गया।
एसओजी थाना, जयपुर में दर्ज एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के साथ-साथ राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 की धाराएं 3, 6, 7 और 10 लगाई गई हैं। फिलहाल इस मामले में किसी गिरफ्तारी या सेवा से बर्खास्तगी का उल्लेख एफआईआर में नहीं है।
मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक सो जी लाल को सौंपी गई है। एसओजी का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य संलिप्त व्यक्तियों या बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा। यह मामला एक बार फिर प्रदेश की भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
