हरिद्वार-ऋषिकेश 1916 समझौता और 105 घाटों पर गैर हिन्दुओं के प्रवेश रोक का सच

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हरिद्वार–ऋषिकेश। नईदिल्ली (प्र.सा)
उत्तराखंड में इन दिनों एक खबर सुर्खियों में है कि राज्य सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश के 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने जा रही है। इस दावे के साथ बार-बार “1916 Agreement” का उल्लेख किया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह मामला क्या है, किसने उठाया, किस कानून के तहत और इसमें सच्चाई कितनी है?

अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के बीच उत्तराखंड सरकार, श्री गंगा सभा और संत समाज की ओर से यह मांग सामने आई कि हरिद्वार-ऋषिकेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनाए रखने के लिए गंगा घाटों पर नियम सख्त किए जाएं। इसी संदर्भ में कहा गया कि 105 प्रमुख गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को नियंत्रित या प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

यह मुद्दा श्री गंगा सभा, कुछ संत संगठनों और स्थानीय धार्मिक संस्थाओं ने उठाया। राज्य सरकार ने इस पर विचार और समीक्षा की बात कही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार किसी भी निर्णय से पहले कानूनी, संवैधानिक और ऐतिहासिक पहलुओं की जांच कर रही है।

1916 Agreement क्या है?समाचारों में जिस 1916 के समझौते का उल्लेख है, वह बताया जाता है कि यह समझौता पंडित मदन मोहन मालवीय और उस समय के ब्रिटिश प्रशासन के बीच हुआ था, जिसका उद्देश्य गंगा की पवित्रता, अविरल प्रवाह और तीर्थ क्षेत्र के धार्मिक चरित्र की रक्षा करना था। कुछ दस्तावेजों और परंपराओं में यह दावा किया जाता है कि उस दौर में गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं की गतिविधियों को सीमित रखने के नियम थे।

किस कानून या अधिनियम के तहत?

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 1916 का यह समझौता आज किसी सक्रिय कानून या अधिनियम के रूप में लागू नहीं है।
वर्तमान में न तो उत्तराखंड सरकार ने ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी किया है,न ही विधानसभा या किसी अधिनियम के तहत गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया गया है।

नगर निगम के कुछ पुराने बायलॉज और धार्मिक स्थलों से जुड़े नियम अवश्य मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पूरे 105 घाटों पर लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

पुराने कानून, नए नियम?

पुराने समय के धार्मिक-प्रशासनिक नियमों को आज के संविधान के संदर्भ में सीधे लागू नहीं किया जा सकता। भारत का संविधान समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और आवागमन के अधिकार की गारंटी देता है। इसलिए यदि कोई नया नियम बनेगा, तो उसे संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरना होगा।

निष्कर्ष: यह खबर पूरी तरह लागू प्रतिबंध की नहीं, बल्कि सरकारी विचार और प्रस्ताव की है।

1916 Agreement एक ऐतिहासिक संदर्भ है, कानून नहीं।
फिलहाल कोई गैर-हिंदू प्रवेश प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।अखबारों में चल रही खबरें इस मायने में सही हैं कि मुद्दा चर्चा में है, लेकिन यह कहना गलत होगा कि सरकार ने 105 घाटों पर रोक लगा दी है। अंतिम फैसला अभी बाकी है—और वह कानून व संविधान के दायरे में ही होगा।

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