पटना । बिहार पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, जिसकी ऊँचाई 33 फीट और वजन लगभग 210 टन है, बिहार के गोपालगंज जिले में पहुंचा। इस विशाल शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम में किया गया है, जो प्राचीन शिल्पकला और पत्थर तराशने के लिए विश्वविख्यात क्षेत्र है।
यह शिवलिंग एक ही ब्लॉक ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है, जिसे विशेष तकनीक और महीनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया। इसे मोनोलिथिक (एकल शिला) शिवलिंग माना जा रहा है, जो इसे विश्व में अद्वितीय बनाता है। आकार, वजन और शिल्प—तीनों दृष्टि से यह शिवलिंग अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
महाबलीपुरम से 21 नवंबर को रवाना किया गया यह शिवलिंग लगभग 45 दिनों की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा तमिलनाड़ू , आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार पहुंचा, रास्ते भर जगह – जगह पर जहां भी रुका वहां पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना और आरती के लिए भक्तों की भीड़ उमर पड़ी भव्य स्वागत किया गया, गोपालगंज पहुँचने पर भी बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन कर भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस भव्य शिवलिंग को 17 जनवरी 2026 को पूर्वी चंपारण (केसरिया) स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विधि-विधान और भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्थापित किया जाएगा। स्थापना समारोह में संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिवलिंग की स्थापना से न केवल बिहार की आध्यात्मिक पहचान और मजबूत होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का बिहार आगमन राज्य के लिए आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रतीक बन गया है।

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