पटना में गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर ऐतिहासिक नगर कीर्तन, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम

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पटना (संवाददाता)
सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर आज पटना साहिब में श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व सिख धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक है, जो उनके जन्म दिवस की स्मृति में मनाया जाता है। सिख परंपरा में जन्म को “प्रकाश” कहा जाता है, क्योंकि गुरु का अवतरण अज्ञान और अन्याय के अंधकार में ज्ञान, साहस और धर्म का प्रकाश फैलाने वाला माना जाता है।

गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 ई. को पटना साहिब में हुआ था। उन्होंने मानवता, समानता और न्याय का संदेश दिया तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष को धर्म बताया। सन् 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर उन्होंने साहसी, अनुशासित और सेवा भाव से परिपूर्ण समाज की नींव रखी। उनका पूरा जीवन त्याग और बलिदान की मिसाल रहा।

इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 359वें प्रकाश पर्व के अवसर पर आज शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को पटना साहिब (पटना सिटी) में भव्य और ऐतिहासिक नगर कीर्तन (जुलूस) का आयोजन किया गया। नगर कीर्तन की शुरुआत गायघाट स्थित गुरुद्वारा से सुबह लगभग 10 बजे हुई, जो अशोक राजपथ, चौक और पटना सिटी के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना साहिब में संपन्न हुआ।

गुरु ग्रंथ साहिब को सजे रथ पर विराजमान किया गया। पंज प्यारे की अगुवाई में चल रहे जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। गुरबाणी कीर्तन, शबद गायन और “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा, शरबत, चाय की व्यवस्था की गई।
प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ, कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया गया। यह पर्व आज भी यह संदेश देता है कि सत्य, साहस, समानता और सेवा के मार्ग पर चलकर ही समाज में वास्तविक प्रकाश फैलाया जा सकता है।

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