अपराधियों का बचना होगा अब नामुमकिन-राजस्थान पुलिस

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13 अक्टूबर को जयपुर में ‘न्याय की नई पहचान’ प्रदर्शनी — अमित शाह करेंगे उद्घाटन

जयपुर। अपराध पर सख्त नियंत्रण और न्याय प्रक्रिया को डिजिटल दिशा देने की दिशा में राजस्थान एक ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बनने जा रहा है।

आगामी सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 को जयपुर एक्सहिबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC), सीतापुरा में “नए आपराधिक कानूनों पर विशेष प्रदर्शनी — न्याय की नई पहचान” का आयोजन होगा

इस भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह करेंगे। आयोजन में केंद्र और राज्य पुलिस संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, विधि विशेषज्ञ और विद्यार्थी शामिल होंगे।

इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण होगा CRiMAC (Crime Multi Agency Center) — एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली, जो अपराधियों की गतिविधियों पर रीयल-टाइम निगरानी रखती है।

यह प्रणाली अपराध की सूचना मिलते ही संबंधित एजेंसियों को तुरंत अलर्ट भेजती है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होती है।राजस्थान पुलिस के अनुसार, यह व्यवस्था “अपराधियों के लिए बच निकलना लगभग नामुमकिन बना देगी।”

CRiMAC का लक्ष्य है — एक अपराध, एक सूचना, कई एजेंसियाँ — एक साथ सक्रिय।

नए कानूनों से बदल जाएगी न्याय प्रणाली की सोच

प्रदर्शनी का उद्देश्य जनता और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को नवीन आपराधिक कानून, 2023 के प्रावधानों से अवगत कराना है।

इनमें शामिल हैं —

1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) – पुराने आईपीसी (IPC) का स्थान लेती है।

2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) – अपराध प्रक्रिया संहिता (CrPC) का नया संस्करण।

3. भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) – डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित नया कानून।

इन तीनों कानूनों का लक्ष्य है तेज़, पारदर्शी और तकनीकी रूप से समर्थ न्याय।

नए कानूनों के तहत अपराध जांच की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है।

अपराध स्थल से साक्ष्य संग्रह, फॉरेंसिक परीक्षण, गवाहों की ऑनलाइन उपस्थिति, चार्जशीट दाखिल करने से लेकर सुनवाई तक — हर चरण में तकनीक की भूमिका को अनिवार्य किया गया है।

e-Sakshya, फेस रिकग्निशन सिस्टम, और AI आधारित अपराध विश्लेषण जैसे उपकरण इस प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे।

राजस्थान पुलिस का कहना है कि यह परिवर्तन “न्याय में देरी” की समस्या को खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

राजस्थान पुलिस, गृह मंत्रालय के सहयोग से, इन नए कानूनों को धरातल पर उतारने में देश की अग्रणी इकाई मानी जा रही है।

राज्य में पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुके हैं।

डिजिटल निगरानी, फॉरेंसिक साक्ष्य और साइबर अपराध जांच के क्षेत्र में राजस्थान मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनेगा।

जनभागीदारी और जागरूकता का मंच

यह प्रदर्शनी आम नागरिकों, विधि छात्रों, पुलिस अधिकारियों और न्यायिक प्रतिनिधियों के लिए खुली रहेगी। यह न केवल कानून व्यवस्था की नई सोच को प्रदर्शित करेगी, बल्कि नागरिकों में “कानून पर विश्वास, न्याय में भरोसा” की भावना को भी मजबूत करेगी।

सुनें “ईश्वरीय वाणी”

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