जालौर (सुंधा पट्टी)
जालौर‑सुंधा पट्टी के चौधरी/आंजणा कलबी समाज की एक विशेष बैठक में आज एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक निर्णय लिया गया है जिसमें समाज की बहू तथा बेटियों को बातचीत/सोशल मीडिया उपयोग के लिए स्मार्टफोन रखने की अनुमति नहीं देने का ऐलान किया गया है। इस निर्णय के अनुसार 26 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से स्मार्टफोन पर पाबंदी लागू कर दी जाएगी, और केवल बुनियादी सुविधाओं वाले नॉर्मल फोन रखने की अनुमति होगी।
समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि यह निर्णय परिवारिक संरचना, संस्कार और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट और रीलों में कहा जा रहा है कि स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग से सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि निर्णय का उद्देश्य सुरक्षा और सामाजिक सदाचार बताया जा रहा है, लेकिन कोई आधिकारिक दस्तावेज़ अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
समाज के कुछ सदस्यों ने कहा कि यह पाबंदी कानूनी आदेश नहीं है बल्कि एक सामाजिक प्रतिबद्धता/नियम है, जिसे समुदाय की सहमति से लागू किया जा रहा है। वहीं कुछ युवाओं ने इस फैसले की सोशल मीडिया पर आलोचना भी की है और उन दशकों की मोबाइल/इंटरनेट उपयोग पर अनुसंधान रिपोर्ट साझा कर रहे हैं जिनसे सकारात्मक पहलू भी सामने आते हैं। �
Business Standard
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के पास स्मार्टफोन रखने का अधिकार कानूनी और संवैधानिक रूप से सुरक्षित है, और इस तरह के सामाजिक निर्णयों को कानून की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए। राजस्थान हाई कोर्ट और अन्य न्यायिक संस्थाओं ने भी पहले मोबाइल/डिजिटल उपयोग जैसे मामलों पर कानूनी दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन वे स्कूल या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों तक सीमित रहे हैं। �
Jagran
इस फैसले पर स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी तक नहीं मिली है, लेकिन जनता में इस विषय पर कई तरह की चर्चा तेजी से बढ़ रही है।
