नई दिल्ली, 5 अगस्त (प्रेस) केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति स्वामित्व को कानूनी पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है। पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, योजना के तहत अब तक 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर ग्रामीणों को संपत्ति अधिकार रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे भूमि विवादों में कमी आने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने बुधवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि स्वामित्व योजना के तहत जारी संपत्ति कार्डों के आधार पर अब तक 11,147 लाभार्थियों को कुल 1,713 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इससे ग्रामीणों के लिए अपनी संपत्ति को वित्तीय संसाधन के रूप में उपयोग करने का रास्ता खुला है।
मंत्री ने बताया कि योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण और सतत संचालन संदर्भ स्टेशन (CORS) तकनीक का उपयोग कर गांवों के आबादी क्षेत्रों के अत्यधिक सटीक डिजिटल मानचित्र तैयार किए जा रहे हैं। इन मानचित्रों के माध्यम से संपत्ति की सीमाएं स्पष्ट रूप से चिन्हित होती हैं, जिससे भूमि एवं संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही जमीनी सत्यापन और पारदर्शी विवाद निस्तारण प्रक्रिया के माध्यम से स्वामित्व रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित की जाती है।
मंत्रालय, भारतीय सर्वेक्षण विभाग और राज्य सरकारों के सहयोग से योजना का क्रियान्वयन कर रहा है। ड्रोन आधारित मैपिंग कार्य समय पर पूरा हो, इसके लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
योजना के तहत तैयार भू-स्थानिक आंकड़ों का उपयोग ‘ग्राम मानचित्र’ ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। यह ऐप ग्राम पंचायतों को गांव की आबादी, सड़कें, सार्वजनिक अवसंरचना, जल स्रोत, प्राकृतिक संसाधन और सामुदायिक परिसंपत्तियों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे ग्राम पंचायत विकास योजना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित बनाने में मदद मिल रही है।
ग्राम मानचित्र ऐप विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने, अवसंरचना की कमियों की पहचान, सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय, परिसंपत्तियों की निगरानी और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे ग्राम पंचायतों की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो रही है और सतत ग्रामीण विकास को गति मिल रही है।
स्वामित्व योजना केवल उन ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में लागू की जा रही है जिन्हें योजना के तहत स्वीकृति प्राप्त है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने, विवाद कम करने और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है।
