राष्ट्रीय युवा संसद में गूंजी सीधी की आवाज, पुनीत शुक्ला ने उठाए महिला सशक्तीकरण और प्रदेश विकास के सवाल

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जयपुर में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और लाड़ली बहना योजना से जुड़े मुद्दों पर रखी बात

सीधी। जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद के मंच पर सीधी के युवा पुनीत शुक्ला ने मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों को सदन के सामने रखा। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे विषयों के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़े सवालों को भी चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया।युवा संसद के दौरान पुनीत शुक्ला ने लाड़ली बहना योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ते हुए यह सवाल उठाया कि महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता को दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अवसरों से किस तरह जोड़ा जा सकता है। उनका जोर इस बात पर रहा कि महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ ऐसे अवसर भी मिलें, जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय स्तर पर रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और छोटे उद्योगों से जोड़ने की दिशा में समानांतर प्रयास किए जाने चाहिए। इससे सरकारी सहायता के साथ महिलाओं के लिए आय के स्थायी साधन विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

युवाओं की भूमिका पर भी दिया जोर

पुनीत शुक्ला ने युवाओं की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से लेकर उद्योग और रोजगार तक के विषयों को उन्होंने युवाओं के भविष्य से जोड़कर सदन के समक्ष रखने का प्रयास किया।उनका कहना रहा कि युवा केवल दर्शक की भूमिका तक सीमित न रहें, बल्कि नीतियों, जनसमस्याओं और विकास के मुद्दों पर अपनी समझ के साथ लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा बनें।

राष्ट्रीय मंच पर सीधी की मौजूदगी

राष्ट्रीय युवा संसद का उद्देश्य युवाओं को संसदीय कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक विषयों पर संवाद का व्यावहारिक अनुभव देना है। जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से पहुंचे युवाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विषयों और सुझावों को मंच पर रखा।सीधी के पुनीत शुक्ला की सहभागिता के जरिए विंध्य क्षेत्र से जुड़ी आवाज भी इस राष्ट्रीय मंच तक पहुंची। विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर लाड़ली बहना योजना को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का उनका सुझाव चर्चा का विषय बना।

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