फ्रांस इस समय तीन मोर्चों पर लड़ रहा है—सड़कों पर उग्र आंदोलन, सत्ता में अस्थिरता और बढ़ता आर्थिक बोझ। नए प्रधानमंत्री से उम्मीदें तो हैं, लेकिन हालात संभालना आसान नहीं होगा।
पेरिस/10 सितंबर।
फ्रांस इन दिनों भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है। राजधानी पेरिस समेत पूरे देश में “Block Everything” आंदोलन ने माहौल बिगाड़ दिया है। जगह-जगह लोग सड़कों पर उतर आए हैं, ट्रैफिक रोका जा रहा है, आगजनी हो रही है और पुलिस के साथ भिड़ंत हो रही है। अब तक करीब 300 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
प्रदर्शन अचानक सोशल मीडिया से शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया। आंदोलन में युवा, छात्र और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हो गए। हालात काबू में रखने के लिए सरकार को 80 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात करने पड़े।
राजनीतिक संकट
इस बवाल के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री बदल दिया है। नए पीएम बने हैं सेबास्टियन लेकॉर्नू। यह पिछले एक साल में चौथे प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा है कि वे “नई शुरुआत” करेंगे और सबको साथ लेकर चलेंगे। लेकिन विपक्ष पहले ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गया है।
आर्थिक मुश्किलें
फ्रांस की अर्थव्यवस्था भी डगमगाई हुई है। सरकारी कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और घाटा यूरोपीय सीमा से लगभग दोगुना है। सिर्फ ब्याज चुकाने के लिए ही हर साल 67 अरब यूरो खर्च करने पड़ रहे हैं। इसकी वजह से बाजार और निवेशक दोनों ही चिंतित हैं।
तीन तरफा मुसीबत
सामाजिक संकट: सड़कों पर हिंसक आंदोलन
राजनीतिक संकट: बार-बार पीएम बदलना और संसद में मतभेद
आर्थिक संकट: बढ़ता कर्ज और घाटा
नए प्रधानमंत्री के लिए यह समय अग्निपरीक्षा जैसा है। वे हालात संभाल पाते हैं या नहीं, यही आने वाले दिनों में तय करेगा कि फ्रांस किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
