नई दिल्ली, 4 अगस्त। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) बच्चों का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो वर्ष 2013 से पहले नियुक्त हुए थे और अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं।
लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें, तैनाती तथा वर्ष 2013 से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षकों का रिकॉर्ड, जो टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित हो सकते हैं, संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास उपलब्ध है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि टीईटी, आरटीई अधिनियम की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता का हिस्सा है और इस अधिनियम के दायरे में आने वाले विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए इसे अनिवार्य माना जाएगा।
इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की अंतिम समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। इससे हजारों शिक्षकों को आवश्यक योग्यता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त एक वर्ष का समय मिल गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि संबंधित राज्य सरकारें और सक्षम प्राधिकारी टीईटी परीक्षा का नियमित आयोजन सुनिश्चित करें। न्यायालय ने अपेक्षा व्यक्त की कि टीईटी का आयोजन प्रत्येक वर्ष दो बार किया जाए तथा दो परीक्षाओं के बीच लगभग छह माह का अंतर रखा जाए, ताकि सभी पात्र शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह व्यवस्था शिक्षकों को निर्धारित न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने का उचित अवसर देने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
