सिरमौर (रीवा) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध: राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र पर घमासान: विरसा मुण्डा विचार मंच ने भी राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन रीवा: रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने जताया कैंसर और पर्यावरण क्षति का खतरा क्योटी जल प्रपात और कृषि बचाने की गुहार: सिरमौर में परमाणु संयंत्र निरस्त करने की मांग परमाणु ऊर्जा की जगह सौर और पवन ऊर्जा अपनाने की मांग, SDM सिरमौर को ज्ञापन सौंपा

भूमि पट्टा विवाद सुलझाए बिना प्रोजेक्ट न लाने की चेतावनी, सिरमौर में लामबंद हुए नागरिक

स्थान: सिरमौर, रीवा (मध्य प्रदेश)दिनांक: 19 अक्टूबर 2026 सिरमौर (रीवा): रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र स्थित रोझौही-क्योटी में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विरोध में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में विरसा मुण्डा विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विष्णुकांत कुशवाहा तथा विंध्य क्षेत्र के समस्त नागरिकों एवं संगठनों द्वारा राष्ट्रपति महोदया के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिरमौर को एक ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में पर्यावरण, जन सुरक्षा और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण का हवाला देते हुए इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही इसके स्थान पर सौर और पवन ऊर्जा जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने की अपील की गई है।

ज्ञापन में उठाई गई मुख्य आपत्तियां एवं मुद्दे

घनी आबादी और सुरक्षा जोखिम:* चेरनोबिल (1986) और फुकुशिमा (2011) जैसी वैश्विक परमाणु आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र की स्थापना अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है। *जल संकट व कृषि पर प्रभाव:* रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय कृषि, पेयजल और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह प्रभावित होगा। *क्योटी जल प्रपात और पर्यावरण क्षति:* प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘क्योटी जल प्रपात’ और आसपास की जैव विविधता को थर्मल डिस्चार्ज एवं विकिरण से अपूरणीय क्षति पहुँचने की आशंका जताई गई है। *स्वास्थ्य संबंधी खतरे:* ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि संयंत्र के आसपास रहने वाली जनता को रेडिएशन के कारण लंग्स कैंसर, ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और आनुवंशिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। जनता का विरोध:* दावों के अनुसार, आसपास के 5 से 35 किलोमीटर क्षेत्र की जनता इस न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध कर रही है और इसे किसी आबादी रहित स्थान पर ले जाने की मांग कर रही है। *भूमि पट्टा विवाद:* ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम रोझौही में वर्ष 2002-2003 में 200 से 250 लोगों को दिए गए पट्टे बाद में निरस्त कर दिए गए थे। वर्तमान में वहाँ सैकड़ों भूमिहीन लोग काबिज हैं। मांग की गई है कि जब तक पट्टे के इस मुद्दे का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक उक्त भूमि पर कोई भी प्रोजेक्ट न लाया जाए। विरोध जताने वालों का कहना है कि प्रशासन एक प्राइवेट कंपनी के पक्ष में पैरवी कर रहा है, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग एकजुट हैं। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया गया है।

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