जयपुर/दौसा
रामगढ़ पचवारा उपखंड के सिसोदिया गांव में शुक्रवार सुबह बिजली निगम की विजिलेंस टीम की कार्रवाई ने हालात ऐसे बना दिए कि मामला न्याय बनाम प्रशासनिक दबाव की बहस में बदल गया। विजिलेंस टीम के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली निगम के अधिकारी और कर्मचारी मनमानी करते हुए वीसीआर भर रहे थे, जबकि कई मामलों में उपभोक्ताओं को बिना ठोस आधार के परेशान किया गया। इसी आक्रोश के बीच सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक रामबिलास मीना मौके पर पहुंचे और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी-कर्मचारी जनता को नाजायज रूप से परेशान करेंगे, तो जनता खुद फैसले लेने पर मजबूर हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गलत तरीके से वीसीआर भरने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम आदमी के साथ अन्याय न हो।
इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर आम उपभोक्ता को डराया जा रहा है?
और अगर ऐसा है, तो क्या यह स्थिति जनता को कानून हाथ में लेने की ओर नहीं धकेलेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिकारी और कर्मचारी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम नहीं करेंगे, तो ऐसे टकराव बार-बार सामने आएंगे। प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले, निष्पक्ष जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि कार्रवाई के नाम पर जनता के साथ अन्याय न हो।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन यह घटना साफ संकेत देती है कि न्याय की अनदेखी, आक्रोश को जन्म देती है—और यही किसी भी व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं ।
