!! श्री गणेश जी की आरती !!
ॐ श्री वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
मस्तक सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फुल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को ऑख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
!! श्री माँ महालक्ष्मी जी की आरती !!
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जगमाता, मैया तुम ही जगमाता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता, मैया सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
तुम ही पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता, मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता, मैया सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता, मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥
शुभ गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता, मैया सुन्दर क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम, बिन कोई नहीं पाता ।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता, मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ॥
!! दोहा !!
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि।
हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे ।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे।
सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं ।।
“ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः”
(आरती पूरी होने के बाद तुलसी में आरती जरूर दिखाना चाहिए, इसके बाद घर के लोगों को आरती लेनी चाहिए।)
