नई दिल्ली/जयपुर । देश में सरकार 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल लागू करने जा रही है , जहां एक ओर हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं दूसरी ओर यह बदलाव पुरानी गाड़ियों के लिए चिंता का कारण बनता नजर आ रहा है। E20 पेट्रोल, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल का मिश्रण होता है, वह अब उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों पर मिलेगा । इथेनॉल, जो गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होता है, को पेट्रोल में मिलाकर तेल कंपनियां बाजार में उपलब्ध करा रही हैं।

लेकिन इस बदलाव का असर सभी वाहनों पर समान नहीं है। जानकारों के अनुसार, E20 के लिए डिजाइन की गई नई गाड़ियां इस ईंधन को आसानी से सहन कर लेती हैं, क्योंकि उनके इंजन, फ्यूल सिस्टम और रबर पार्ट्स इथेनॉल के अनुरूप बनाए गए हैं। वहीं पुरानी गाड़ियां, खासकर 5-10 साल पुराने मॉडल, इस ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल नहीं ।
पुरानी गाड़ियों में E20 पेट्रोल के उपयोग से इंजन पार्ट्स पर जंग का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि इथेनॉल में नमी खींचने की प्रवृत्ति होती है। इसके अलावा फ्यूल पाइप और रबर सील्स जल्दी खराब हो सकते हैं। माइलेज में भी गिरावट देखी जा सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है। कई मामलों में इंजन नॉकिंग और स्टार्टिंग प्रॉब्लम जैसी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं।
हालांकि सरकार का मानना है कि यह बदलाव देश के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद है। E20 के जरिए न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि तेल आयात पर निर्भरता भी घटेगी और किसानों को इथेनॉल उत्पादन से सीधा लाभ मिलेगा। यही वजह है कि ऑटो कंपनियां अब तेजी से E20 अनुकूल इंजन वाली गाड़ियां बाजार में उतार रही हैं।
कुल मिलाकर E20 पेट्रोल जहां नई तकनीक वाली गाड़ियों के लिए एक बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभरा है, वहीं पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए यह बदलाव चिंता का विषय बना हुआ है ।

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