अजमेर। शहर के आगरा गेट क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया है। स्थानीय सिविल न्यायालय (कनिष्ठ खंड) ने एक स्ट्रीट वेंडर को राहत देते हुए नगर निगम की हटाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
आगरा गेट क्षेत्र में लंबे समय से ठेला लगाकर रोजी-रोटी चला रहे एक स्ट्रीट वेंडर को नगर निगम द्वारा हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। निगम का तर्क था कि सड़क पर अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी है।
वहीं वेंडर का कहना था कि वह वर्षों से उसी स्थान पर व्यापार कर रहा है और उसे बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास के हटाया जा रहा है, जिससे उसकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
🧾 कोर्ट में क्या हुआ?
वेंडर ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सिविल न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि—
उसे बिना उचित प्रक्रिया अपनाए हटाया जा रहा है
कोई सर्वे या वैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई
उसे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया
🏛️ अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया वेंडर के पक्ष को उचित मानते हुए आदेश दिया कि—
अगली सुनवाई तक वेंडर को हटाया नहीं जाएगा
नगर निगम को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए
📜 कानून क्या कहता है?
यह मामला स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण एवं विनियमन) अधिनियम, 2014 से जुड़ा है। इस कानून के तहत—
किसी भी वेंडर को हटाने से पहले सर्वे कराना अनिवार्य है
टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) की अनुमति जरूरी होती है
वेंडर को वैकल्पिक स्थान या पुनर्वास देना अनिवार्य है
🔍 क्यों अहम है यह फैसला?
यह आदेश छोटे व्यापारियों के रोजगार अधिकारों की रक्षा करता है
नगर निगम की जल्दबाजी या एकतरफा कार्रवाई पर सवाल उठाता है
अन्य स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी यह एक कानूनी मिसाल बन सकता है
📌 आगे क्या?
अब इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट अंतिम निर्णय देगा। तब तक आगरा गेट क्षेत्र में संबंधित वेंडर अपना काम जारी रख सकेगा।
👉 कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक ठेले तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन का बड़ा सवाल बन गया है।
