रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ पताई में भी हल्ला बोल, ‘विनाश नहीं विकास चाहिए’ के नारों से गूंजी पंचायत

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घरों से महज 2-3 किलोमीटर दूर प्रस्तावित परमाणु संयंत्र का विरोध, ग्रामीणों ने कहा- किसी भी कीमत पर नहीं बनने देंगे प्लांट

रीवा, मध्यप्रदेश | 31 अक्टूबर 2026। रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत स्थानीय क्षेत्र में प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में अब ग्राम पंचायत पताई के ग्रामीणों का आक्रोश भी खुलकर सड़कों पर आ गया है। पताई पंचायत की गोशाला बस्ती के पास सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। “विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए” और “परमाणु हटाओ जीवन बचाओ” के गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपने घरों से महज 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर रोझौही में किसी भी कीमत पर यह परमाणु संयंत्र नहीं बनने देंगे।

स्वास्थ्य और जीवन पर मंडराते खतरे को लेकर गहरी चिंता

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के इतिहास और इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए वे अत्यधिक भयभीत हैं। उनका मानना है कि इस संयंत्र से निकलने वाले विकिरण और कचरे से गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे क्षेत्र में ल्यूकेमिया और ब्लड कैंसर, फेफड़ों, आंतों और थायराइड का कैंसर तथा नवजातों में जन्मजात विकलांगता जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।

वैश्विक और राष्ट्रीय परमाणु आपदाओं का दिया हवाला

प्रदर्शनकारियों ने दुनिया भर में हुई भयानक परमाणु दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार और प्रशासन को आगाह किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल्स आइलैंड, एसएल-1 और टोकाईमुरा जैसी त्रासदियों का उदाहरण दिया।इसके साथ ही देश के भीतर तारापुर, काकरापार, नरौरा, कलपक्कम, कुडनकुलम और रावतभाटा आदि संयंत्रों में हुई आईएनईएस (INES) लेवल 01 से 03 तक की घटनाओं का हवाला देते हुए आबादी वाले क्षेत्रों के पास ऐसी परियोजनाओं के खतरे को रेखांकित किया।

सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी और कड़ी मांग

इस विरोध प्रदर्शन में गांव के तमाम गणमान्य लोग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। प्रमुख रूप से सुनील मिश्रा, संजय कुमार, सुनीता साकेत, सविता यादव, राम स्वराज प्रजापति, कलावती, गुड़िया, लक्ष्मण यादव और बृजेंद्र मिश्रा आदि ने नेतृत्व करते हुए सरकार से मांग की है कि परमाणु ऊर्जा के खतरनाक इतिहास को देखते हुए इसके उपयोग और स्थापना पर पूरी पाबंदी लगाई जाए।साथ ही रोझौही के इस प्रस्तावित प्लांट को तत्काल प्रभाव से इस घनी आबादी वाले क्षेत्र से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।

इसके पहले भी कई नजदीकी ग्रामों में हो चुके प्रदर्शन

गौरतलब है कि इसके पूर्व भी रोझौही गांव के नजदीक और आसपास के कई ग्रामों जैसे अतरैला, बांस, पनगड़ी आदि में भी लोग प्रदर्शन कर चुके हैं और इसके संभावित नुकसान को लेकर रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग कर चुके हैं।स्पष्ट है कि अब यह आंदोलन सिर्फ रोझौही या सरई कला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की सैकड़ों ग्राम पंचायतों में भी फैल चुका है।ग्रामीणों के इस उग्र प्रदर्शन ने प्रशासन और नीति निर्माताओं के समक्ष बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए इस आंदोलन को और तेज करने की बात कह रहे हैं।स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा, मध्यप्रदेश

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