स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2026 रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जारी आंदोलन के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रमोद शर्मा की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। पिछले छह दिनों से आमरण अनशन कर रहे प्रमोद शर्मा ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 से जल ग्रहण करना भी बंद कर दिया है। आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मदरी के डॉक्टर रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा और उनके सहयोगियों के स्वास्थ्य की जांच के बाद बताया कि अनशनकारियों के स्वास्थ्य संबंधी कुछ मानक सामान्य नहीं पाए गए हैं। कई लोगों के वजन और रक्तचाप में भी सामान्य से अलग स्तर दर्ज किए गए हैं। डॉक्टर के अनुसार, बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रमोद शर्मा और उनके साथियों को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखना जरूरी है।
अन्न-जल त्यागने के बाद स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहे जल सत्याग्रह के बाद प्रमोद शर्मा ने भोजन त्यागकर आमरण अनशन शुरू किया था। अब जल ग्रहण करना भी बंद करने के उनके फैसले ने आंदोलन की गंभीरता बढ़ा दी है।आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को रद्द नहीं किया जाता, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी में रहना अनशनकारियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
बबली कोल और एक दर्जन महिलाओं का भी कड़ा रुख
आंदोलन में शामिल बबली कोल का स्वास्थ्य भी चिंताजनक बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बबली कोल पिछले तीन दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उन्होंने भोजन का पूरी तरह त्याग कर रखा है।इस आंदोलन में लगभग एक दर्जन महिलाएं भी जल सत्याग्रह पर बैठी हुई हैं। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि यदि रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना रद्द नहीं की गई, तो वे प्रमोद शर्मा के साथ आंदोलन स्थल पर ही अपने प्राण त्यागने को तैयार हैं।महिलाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी साथी विमला कोल की मौत के बाद भी उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे भी अपने अधिकारों और क्षेत्र के भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नजर आंदोलन पर
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम आंदोलन स्थल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अनशनकारियों की बिगड़ती तबीयत के बीच तत्काल चिकित्सकीय देखभाल और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।ग्रामीणों और आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना रद्द की जाए। उनका कहना है कि जब तक सरकार इस संबंध में आधिकारिक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।रोझौही में लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सरकार के रुख पर टिकी हैं।

