सरई कला में शोक और आक्रोश का माहौल, प्रशासनिक उपेक्षा के आरोप; क्योटी-कलवारी मार्ग पर नया पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी
रीवा। जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जारी जल सत्याग्रह के बीच महिला आंदोलनकारी विमला कोल की मृत्यु की सूचना सामने आई है। आंदोलन के छठवें दिन सामने आए इस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में शोक और आक्रोश का माहौल बताया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने परियोजना को वापस लेने की मांग दोहराते हुए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरई कला पंचायत क्षेत्र में विमला कोल कई अन्य ग्रामीणों के साथ प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध में चल रहे जल सत्याग्रह में शामिल थीं। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतका के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उनके अनुसार, मृतका के पति जमुना कोल ने आंदोलन के कठिन हालात को घटना से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।हालांकि, विमला कोल की मृत्यु के वास्तविक कारण की स्वतंत्र अथवा चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मृत्यु को ठंड या जल सत्याग्रह का प्रत्यक्ष परिणाम बताने से पहले आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।
शासन-प्रशासन की भूमिका पर परिजनों ने उठाए सवाल
मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि कई दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं की सुध नहीं ली। घटना के बाद भी अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आने की बात कही गई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से घटना की जांच कराने, पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम करने की मांग की है। इन आरोपों पर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
विमला कोल की मृत्यु के बाद भी जारी रहेगा सत्याग्रह
आंदोलनकारियों ने कहा है कि विमला कोल की मृत्यु के बावजूद प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांग परियोजना को वापस लेने की है। ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े सवालों का समाधान किए बिना उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।आंदोलन में आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा, समाजसेवी विष्णुकांत कुशवाहा, दुलहरा ग्राम की समाजसेविका नीलू दहिया और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी की जानकारी भी सामने आई है।
क्योटी-कलवारी मार्ग पर नया पंडाल, अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान
आंदोलन का दायरा बढ़ाने की दिशा में 22 अक्टूबर 2026 से नजदीकी ग्राम पंचायत क्योटी में क्योटी-कलवारी मुख्य मार्ग के समीप नया पंडाल लगाए जाने की जानकारी दी गई है। आंदोलनकारियों ने संकेत दिया है कि अब विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक जारी रखा जाएगा।ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शासन-प्रशासन प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस लेने का निर्णय नहीं करता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। वहीं, घटना की जांच, मृतका के परिवार को सहायता और सत्याग्रह में शामिल लोगों के लिए चिकित्सा सुविधाओं की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।
अब प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
रोझौही परियोजना को लेकर जारी विरोध के बीच विमला कोल की मृत्यु ने आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न भी सामने ला दिया है। अब यह महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन घटना के संबंध में क्या जानकारी देता है, मृत्यु के कारणों की पुष्टि कैसे होती है और प्रभावित परिवार की सहायता के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आंदोलनकारियों ने अपना संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है। रोझौही परियोजना को लेकर ग्रामीणों की मांगों, घटना की निष्पक्ष जांच और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर अब क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।
