रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट मामला: ग्राम सभा के विरोध के बावजूद मनमानी का आरोप, ग्रामीणों ने तीसरी बार टाटा कंपनी व अधिकारियों को खदेड़ा

संविधान बनाम मनमानी: ग्राम सभा के खारिज प्रस्ताव के बाद भी रोझौही में अफसरों की दस्तक, ग्रामीणों में आक्रोश रोझौही न्यूक्लियर प्लांट विवाद: ‘पेशा’ कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति बिना परियोजना पर उठे गंभीर सवालरोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: ग्रामीणों ने फिर खदेड़ा टाटा कंपनी और अफसरों का अमला“रीवा की सिरमौर तहसील में घमासान: न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में एकजुट हुए ग्रामीण, अधिकारियों को तीसरी बार उल्टे पांव भागना पड़ा

दिनांक: 12 अक्टूबर 2026

रीवा। जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन/कंपनी के बीच घमासान जारी है। ग्राम सभा द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में स्पष्ट प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 5 बजे तहसीलदार सिरमौर और पुलिस अधिकारी एवं टाटा कंपनी के प्रतिनिधि ग्रामीणों के बीच पहुंचे जिसके बाद ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को तीसरी बार क्षेत्र से उल्टे पांव भागने पर मजबूर होना पड़ा।

विरोध प्रदर्शन और तनावपूर्ण स्थिति

रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर परियोजना के विरोध में एकत्र ग्रामीण, रीवा मध्यप्रदेश

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम सभा के असहमति के फैसले को नजरअंदाज कर कंपनी और प्रशासनिक अधिकारी आए दिन गांव में डेरा डाल रहे हैं और गांव वालों पर जबरदस्ती कर रहे हैं। सोमवार को जैसे ही अधिकारियों की टीम गांव पहुंची, ग्रामीणों ने एकजुट होकर “न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए” के जोरदार नारे लगाए और उन्हें खदेड़ दिया।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सिरमौर तहसील की तहसीलदार बिंदु तिवारी द्वारा बार-बार गांव आकर उन पर परियोजना के पक्ष में सहमति बनाने का दबाव डाला जा रहा है।

ग्रामीणों की चेतावनी:

ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि रात के अंधेरे में जबरन गाड़ियां या मशीनरी गांव में दाखिल करने की कोशिश की गई, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी और किसी भी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

कानूनी सवाल: क्या ग्राम सभा की अनदेखी संभव है

इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1993-94 और ग्राम सभा की शक्तियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।पेशा (PESA) कानून लागू: यह पूरा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है, जहां पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी ‘पेशा कानून’ भी प्रभावी होना चाहिए। *संवैधानिक अधिकार: नियमानुसार पेशा कानून और पंचायती राज अधिनियम के तहत आदिवासी व अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी बड़ी विकास परियोजना या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। बड़ा सवाल: जब ग्राम सभा ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित कर न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध कर दिया है, तो बिना अनुमति के इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रशासनिक मनमानी किस आधार पर की जा रही है?

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग

रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ निरंतर आवाज उठा रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस पूरे मामले पर सरकार और प्रशासन के रुख की कड़े शब्दों में निंदा की है।”सरकार को तत्काल प्रभाव से इस जनविरोधी परियोजना को रद्द करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की भावना और संविधान में प्रदत्त ग्राम सभा के अधिकारों की कद्र की जानी चाहिए। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर जबरन थोपी जा रही यह परियोजना क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। न केवल रोझौही बल्कि आसपास के 30 किमी के क्षेत्र के सैकड़ों ग्राम पंचायतों में आमजन पर यह विकिरण प्रभाव डालेगा और जानलेवा बीमारियां वाला प्रदूषण फैलाएगा।”— शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता

प्रशासन और कंपनी ग्राम सभा के प्रस्तावों का करे सम्मान

रोझौही क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जनआक्रोश और तीसरी बार अधिकारियों को खदेड़े जाने की घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन कानून के दायरे में रहकर ग्राम सभा के फैसले का सम्मान करता है और जनभावनाओं की कद्र करता है या टकराव की स्थिति और भी गहरी होती है।

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