न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए”: रीवा के सरई कला में ग्राम सभा का बड़ा फैसला, टाटा कंपनी के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण

Spread the love

*टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, नेताओं से पूछे तीखे सवाल; जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन की दी चेतावनी*

*रीवा: चेर्नोबिल-फुकुशिमा के खौफ के साए में ग्रामीण; रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ खोला मोर्चा**रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज: सरई कला ग्राम सभा ने खारिज किया प्रस्ताव, ग्रामीणों ने कहा— ‘विनाश नहीं, विकास चाहिए’*

रीवा दिनांक 05 अक्टूबर 2026

रीवा जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। ग्राम पंचायत सरई कला में आयोजित ग्राम सभा ने न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। इसके बावजूद शासन और कंपनी द्वारा काम आगे बढ़ाने की कोशिशों से आक्रोशित ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।ग्रामीणों ने “विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए” के जोरदार नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।

रेडिएशन, कैंसर और विस्थापन का सता रहा डर

प्रस्तावित प्लांट को लेकर ग्रामीणों में रेडिएशन से होने वाले दूरगामी खतरों को लेकर गहरा भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि न्यूक्लियर कचरे से जल, हवा और जमीन तीनों में व्यापक प्रदूषण फैलेगा, जिससे आसपास के हजारों गांव प्रभावित होंगे। रूस के चेर्नोबिल और जापान के फुकुशिमा डाईची परमाणु हादसों का उदाहरण देते हुए ग्रामीणों ने अंदेशा जताया कि यदि यहां कोई दुर्घटना होती है तो आने वाली पीढ़ियों को जन्मजात विकलांगता और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में लगभग 3,000 की आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) वर्ग की है। पूरी ग्राम पंचायत में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी गरीब और वंचित तबके की है, जिन पर बेघर होने और विस्थापन का सीधा खतरा मंडरा रहा है।

जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूटा गुस्सा

ग्रामीणों का गुस्सा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों — डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक दिव्यराज सिंह—पर भी फूटा। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा कि नेता अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं और खुद वहीं बस जाएंगे, लेकिन स्थानीय गरीब ग्रामीणों को रेडिएशन और खतरनाक बीमारियों के हवाले करना चाहते हैं।विरोध के तहत पूर्व में ग्रामीणों ने सर्वे के लिए आई मैसर्स Fugro (फूग्रो) कंपनी की बोरिंग मशीनों को काम करने से रोककर वापस लौटा दिया था।

जनविरोधी कदम उठा रही सरकार”: सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस मुद्दे पर सरकार और कंपनी के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संवैधानिक संस्था ‘ग्राम सभा’ ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और जनता लगातार विरोध कर रही है, तो जबरन काम कराने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि लोगों को निरंतर भय के साए में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

जिला मुख्यालय में प्रदर्शन की चेतावनी

सरई कला और रोझौही के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई और न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना को रद्द नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय का घेराव कर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *