मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यप्रणाली से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। मामला विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान लिए गए कुछ फैसलों में कथित तौर पर सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, इससे जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने तत्काल CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले निर्वाचन आयोग और संबंधित पक्षों का जवाब तथा रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।
क्या है पूरा विवाद?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय कथित रूप से पूरे निर्वाचन आयोग की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाओं में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग की सामूहिक कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
मामले में विशेष रूप से SIR के दौरान मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया है। अदालत ने यह जानने की इच्छा जताई कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, बहुमत से या केवल CEC के स्तर पर।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्वाचन आयोग से संबंधित निर्णयों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत का रुख यह है कि संवैधानिक संस्था को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि कोई निर्णय कानून के अनुरूप नहीं था, तो न्यायालय उस निर्णय को रद्द करने पर विचार कर सकता है।
वहीं, CEC के तत्काल निलंबन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी है। इसलिए वर्तमान स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने CEC को निलंबित कर दिया है या उनके खिलाफ आरोपों को सही ठहरा दिया है।
फॉर्म-6 भी सुनवाई के केंद्र में
सुनवाई के दौरान मतदाता पंजीकरण से जुड़े संशोधित फॉर्म-6 का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त होने की बात नहीं कही जा सकती।
आगे क्या होगा?
अब निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब तथा रिकॉर्ड सामने आने के बाद अदालत मामले की आगे सुनवाई करेगी। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि SIR से जुड़े विवादित फैसले निर्वाचन आयोग की निर्धारित सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत लिए गए थे या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है, जवाब मांगा है और CEC के निलंबन पर अंतरिम आदेश देने से इनकार किया है। अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी आना बाकी है।
