भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी को मिले बराबर मत, निर्वाचन प्रक्रिया के तहत लॉटरी से हुआ निर्णय
अजमेर। अजमेर नगर निगम के उपमहापौर चुनाव में मंगलवार को मुकाबला उस समय बेहद रोचक हो गया, जब भाजपा प्रत्याशी हेमंत सांखला और कांग्रेस प्रत्याशी नौरत गुर्जर को मतदान में बराबर 40-40 मत मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच किसी को बढ़त नहीं मिलने पर निर्वाचन प्रक्रिया के तहत लॉटरी कराई गई। इसमें हेमंत सांखला के नाम की पर्ची निकलने के बाद उन्हें उपमहापौर निर्वाचित घोषित किया गया।
उपमहापौर पद के लिए भाजपा ने वार्ड 46 के पार्षद हेमंत सांखला को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से वार्ड 65 के पार्षद नौरत गुर्जर मैदान में थे। मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद दोनों प्रत्याशियों को 40-40 मत मिलने से स्थिति बराबरी पर पहुंच गई।
बराबरी की स्थिति में चुनावी प्रक्रिया के अनुसार दोनों प्रत्याशियों के नाम की पर्चियां तैयार कर लॉटरी कराई गई। पर्ची में हेमंत सांखला का नाम आने के साथ ही उनके समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया और उन्हें उपमहापौर घोषित कर दिया गया।
महापौर चुनाव के बाद बदला समीकरण
अजमेर नगर निगम में उपमहापौर चुनाव से एक दिन पहले महापौर पद के लिए मतदान हुआ था। इसमें भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल को 37 मतों से पराजित किया था।
महापौर चुनाव के अगले दिन उपमहापौर के लिए हुए मतदान में तस्वीर अलग रही। यहां दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी 40-40 मतों पर बराबरी पर रहे। इससे निगम की राजनीति में मतदान के दौरान बने समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
80 सदस्यीय सदन में अब भाजपा के पास दोनों प्रमुख पद
अजमेर नगर निगम में कुल 80 पार्षद हैं। महापौर पद पर अनामिका शर्मा और अब उपमहापौर पद पर हेमंत सांखला के निर्वाचित होने के बाद निगम के दोनों प्रमुख पद भाजपा के पास हैं।
हालांकि सदन का राजनीतिक गणित इससे अधिक जटिल है। निगम चुनाव के परिणाम में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई थीं। इसके अलावा 11 निर्दलीय पार्षद भी निर्वाचित हुए।
ऐसे में महापौर और उपमहापौर चुनाव के परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि निगम की राजनीति में केवल मूल दलों की संख्या ही निर्णायक नहीं रही, बल्कि चुनाव के समय बने समर्थन और राजनीतिक समीकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अब चुनाव नहीं, निगम चलाने की चुनौती
महापौर और उपमहापौर का चुनाव पूरा होने के बाद अब नगर निगम के सामने शहर से जुड़े मुद्दों पर काम करने की चुनौती है। सड़क, सफाई, जलभराव, अतिक्रमण, यातायात, प्रकाश व्यवस्था और विकास कार्य जैसे मुद्दे नए बोर्ड की प्राथमिकता में रहेंगे।
उपमहापौर हेमंत सांखला के सामने विशेष चुनौती यह होगी कि 80 सदस्यीय सदन में विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय पार्षदों के साथ समन्वय बनाकर निगम के कामकाज को आगे बढ़ाया जाए।
अजमेर के उपमहापौर चुनाव का परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहेगा कि जनता के प्रतिनिधियों के मतदान में दोनों प्रत्याशी बराबरी पर रहे और अंतिम निर्णय निर्वाचन प्रक्रिया में हुई लॉटरी से हुआ। अब पर्ची से मिली जिम्मेदारी को शहर के कामकाज में किस तरह बदला जाता है, इस पर अजमेर की जनता की नजर रहेगी।
