अस्पताल का दावा—18 वर्षीय आयुष को दिया गया निर्धारित एंटी रेबीज इंजेक्शन, स्नेक बाइट की बात मरीज की ओर से बताई गई; प्रबंधन ने लापरवाही से किया साफ इनकार
रीवा। संजय गांधी स्मारक चिकित्सालय में कुत्ते के काटने के बाद मरीज को कथित तौर पर एंटी स्नेक वेनम लगाए जाने की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों बाद अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले पर अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। चिकित्सालय प्रशासन ने प्रकाशित खबर में लगाए गए आरोपों को भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार बताते हुए उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही से स्पष्ट इनकार किया है।अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक मामला 5 सितंबर 2026 की शाम का है, जब 18 वर्षीय आयुष सिंह उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा विभाग पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक परीक्षण के दौरान मरीज की ओर से सर्पदंश की बात बताई गई, जिसके आधार पर ओपीडी पर्ची में वही शिकायत दर्ज की गई।इसके बाद वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशन में मरीज का परीक्षण किया गया। अस्पताल के आधिकारिक पक्ष के अनुसार, जांच के दौरान मरीज ने स्वयं स्पष्ट किया कि वास्तव में उसे कुत्ते ने काटा था और उससे बातचीत के दौरान गलती से सर्पदंश की बात कही गई थी।स्थिति स्पष्ट होने के बाद चिकित्सकों ने डॉग बाइट के निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार मरीज को एंटी रेबीज इंजेक्शन दिया। अस्पताल प्रबंधन ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि मरीज को एंटी स्नेक वेनम दिए जाने का आरोप सही नहीं है।
अस्पताल ने बताई दोनों इंजेक्शन की प्रक्रिया
चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार, सर्पदंश के मामलों में इस्तेमाल होने वाला एंटी स्नेक वेनम अस्पताल में मरीज को विधिवत भर्ती करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत दिया जाता है। वहीं कुत्ते के काटने के मामलों में एंटी रेबीज वैक्सीन ओपीडी स्तर पर भी दी जाती है।अस्पताल का दावा है कि आयुष को उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद डॉग बाइट के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत एंटी रेबीज की खुराक ही दी गई थी।इस संबंध में गांधी स्मारक चिकित्सालय रीवा के संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि संबंधित खबर तथ्यों के विपरीत है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि मरीज के उपचार और देखभाल में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई तथा निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
एक ही मामले पर सामने आए दो अलग-अलग दावे
इस पूरे घटनाक्रम में अब मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि एक ओर मरीज से जुड़ी प्रारंभिक खबर में पर्ची पर ‘स्नेक बाइट’ और एंटी स्नेक वेनम का उल्लेख किए जाने का दावा सामने आया था, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मरीज को सही उपचार मिला और उसे एंटी रेबीज इंजेक्शन ही दिया गया।ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर अब अस्पताल के आधिकारिक स्पष्टीकरण ने तस्वीर का दूसरा पक्ष सामने रखा है। अस्पताल प्रशासन ने अपनी व्यवस्था और चिकित्सकीय टीम का बचाव करते हुए कहा है कि प्रकाशित आरोपों में तथ्यात्मक आधार नहीं है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन के आधिकारिक खंडन के बाद इस मामले में मरीज द्वारा बताई गई जानकारी, ओपीडी पर्ची में दर्ज विवरण और वास्तव में लगाए गए इंजेक्शन से संबंधित रिकॉर्ड ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट करने में अहम होंगे।
