रीवा जिले की पावन स्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह लगातार बना हुआ है। कथा के पांचवें दिन आचार्य डॉ. गौरी शंकर शुक्ला ने छठे से नौवें स्कंध तक के प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, कर्म, भक्ति और जीवन प्रबंधन का संदेश दिया।
अजामिल के पतन और उद्धार की कथा ने किया भावुक
कथा के दौरान अजामिल उद्धार प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया गया। बताया गया कि अजामिल प्रारंभ में वेद-शास्त्रों का ज्ञाता और संस्कारी ब्राह्मण था, लेकिन कुसंगति और काम के प्रभाव में आकर वह धर्म के मार्ग से भटक गया। जीवन के अंतिम समय में जब उसने अपने पुत्र को पुकारते हुए ‘नारायण’ नाम का उच्चारण किया, तब भगवान के पार्षदों ने प्रकट होकर यमदूतों को रोक दिया। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से भगवान के नाम की महिमा और मनुष्य के जीवन में सत्कर्मों के महत्व को समझाया।
समुद्र मंथन में छिपा जीवन का संदेश
आठवें स्कंध में समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, महर्षि दधीचि का अस्थिदान, कूर्म अवतार, वामन अवतार और मोहिनी अवतार जैसे प्रसंगों का विस्तार से वर्णन हुआ। हलाहल विष के प्रकट होने पर भगवान शिव द्वारा उसे कंठ में धारण करने और नीलकंठ बनने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।आचार्य ने समुद्र मंथन को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य का मस्तिष्क भी एक समुद्र की तरह है, जिसमें चिंतन और मंथन के दौरान सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के विचार उत्पन्न होते हैं। देव और असुर का संघर्ष मनुष्य के भीतर चलने वाले अच्छे-बुरे विचारों के द्वंद्व का प्रतीक है। जीवन में धैर्य, विवेक और सत्कर्मों के माध्यम से नकारात्मकता को नियंत्रित कर सकारात्मक विचारों को अपनाना ही वास्तविक जीवन प्रबंधन है।
7 सितंबर तक चलेगा भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ
कैथा के ऐतिहासिक हनुमान मंदिर परिसर में 31 अगस्त से प्रारंभ हुआ श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ 7 सितंबर 2026, सोमवार तक चलेगा। आयोजकों ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी नागरिकों से कथा में पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ अर्जित करने की अपील की है।
