अनशन पर बैठे पिता से मिले डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, बोले- जांच में जो भी दोषी मिला, उस पर होगी कड़ी कार्रवाई; दो डॉक्टर और नर्स पहले ही निलंबित
रीवा।संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में 26 अगस्त को उपचार के दौरान हुई श्रीमती कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले ने अब गंभीर प्रशासनिक जांच का रूप ले लिया है। घटना से आहत मृतका के पिता राम शिरोमणि मिश्रा द्वारा न्याय और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर शुरू किया गया आमरण अनशन लगातार चर्चा में बना हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनरत पिता से मुलाकात की और पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच कराने के निर्देश दिए।उपमुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सिरमौर एसडीएम को सौंपते हुए 30 दिवस के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।प्रशासनिक जांच में घटना से जुड़े उपचार, चिकित्सकीय प्रक्रिया, अस्पताल की व्यवस्थाओं और सामने आए आरोपों सहित पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक पड़ताल की जाएगी। जांच में यदि किसी व्यक्ति की भूमिका अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई किए जाने की बात प्रशासन की ओर से कही गई है।
धरना स्थल पर पहुंचे डिप्टी सीएम, पिता से आमने-सामने हुई बात
अनशन स्थल पर पहुंचे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मृतका के पिता राम शिरोमणि मिश्रा से मुलाकात कर उनकी बात सुनी। पिता लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि घटना में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिस स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होती है, वहां तक कार्रवाई पहुंचनी चाहिए। परिवार लंबे समय से इस मामले में स्पष्ट जवाब और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम की मांग कर रहा है।मुलाकात के दौरान पीड़ित पिता ने अपनी पीड़ा और नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चे को खो दिया है और अब उनकी लड़ाई सिर्फ मुआवजे या औपचारिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही चाहते हैं।
पहली जांच में दो डॉक्टर और नर्सों पर हो चुकी है कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए दो चिकित्सकों और नर्सों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है। हालांकि, इसके बावजूद मृतका के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि घटना की वास्तविक जिम्मेदारी सामने आने तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।अब मजिस्ट्रियल जांच इस पूरे मामले में अहम मानी जा रही है। जांच अधिकारी के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि अस्पताल में महिला के भर्ती होने से लेकर उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ने और मौत तक किन परिस्थितियों में घटनाक्रम आगे बढ़ा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि कहीं चिकित्सकीय प्रक्रिया, ड्यूटी व्यवस्था अथवा उपचार में ऐसी कोई चूक तो नहीं हुई, जिसका घटना से सीधा संबंध हो।
30 दिन में सामने आएगा जांच का नतीजा
कलेक्टर द्वारा एसडीएम सिरमौर को दिए गए आदेश के बाद अब प्रशासनिक जांच की समय-सीमा भी तय हो गई है। एसडीएम को पूरे मामले की जांच कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने अब मामले को औपचारिक शिकायत के स्तर से आगे बढ़ाकर मजिस्ट्रियल जांच के दायरे में ला दिया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। यदि जांच में लापरवाही या किसी की जवाबदेही प्रमाणित होती है तो संबंधितों पर आगे की कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।फिलहाल राम शिरोमणि मिश्रा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे हुए हैं। डिप्टी सीएम की मुलाकात और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद प्रशासन ने भले ही अगला कदम तय कर दिया हो, लेकिन पीड़ित परिवार की नजर अब सिर्फ एक चीज पर है—जांच में सच क्या सामने आता है और जिम्मेदारी तय होने के बाद कार्रवाई कितनी दूर तक जाती है।
