भारत की सड़कों पर दौड़ रही हरित क्रांति, इलेक्ट्रिक वाहनों ने पकड़ी रफ्तार

Spread the love

2016 के मुकाबले EV बिक्री 46 गुना बढ़ी, 2030 तक हर तीसरा नया वाहन इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 5 अगस्त। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती लोकप्रियता भारत के परिवहन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2016 के बाद से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 46 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2016 में लगभग 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 23 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गया। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब केवल प्रदूषण कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक विकास की नई ताकत बन रही है।

पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू की हैं। नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान, फेम (FAME) योजना, पीएम ई-ड्राइव योजना, ऑटो एवं ऑटो कंपोनेंट पीएलआई योजना तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी पीएलआई जैसी योजनाओं के जरिए ईवी खरीद पर प्रोत्साहन, घरेलू निर्माण, बैटरी उत्पादन और चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन नीतियों का असर अब जमीन पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी महज 0.08 प्रतिशत थी, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8.26 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कोविड-19 महामारी के बाद सरकारी सब्सिडी, नई तकनीक और बेहतर मॉडल आने से विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

ईवी बाजार के विस्तार में उत्तर प्रदेश सबसे आगे निकलकर सामने आया है। वर्ष 2025 में यहां चार लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई, जो देश की कुल ईवी बिक्री का लगभग 18 प्रतिशत है। इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब इलेक्ट्रिक वाहन केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ चार्जिंग नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जुलाई 2026 तक देश में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें 16,561 फास्ट चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं। सरकार ने वर्ष 2030 तक पूरे देश में 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा भी अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।

भारत अब केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाला बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टीवीएस, बजाज जैसी भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जबकि कई वैश्विक कंपनियां भी भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की तैयारी में हैं। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक ईवी सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारतीय ईवी क्षेत्र में 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लागू होने से भी इनकी कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अहम भूमिका दी गई है। सरकार का कहना है कि मजबूत नीतियां, घरेलू विनिर्माण, बढ़ता निवेश, आधुनिक तकनीक और तेजी से विकसित हो रहा चार्जिंग नेटवर्क भारत को आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन केंद्रों में शामिल कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *